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उपराष्ट्रपति ने इमरजेंसी का जिक्र करते हुए न्यायपालिका की भूमिका पर उठाए सवाल

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जोधपुर – भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जोधपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में 1975 के आपातकाल को लेकर न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तानाशाही के आगे न्यायपालिका ने आत्मसमर्पण कर दिया था, जो देश के विकास में एक महत्वपूर्ण बाधा बन गया।

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धनखड़ ने शनिवार को राजस्थान हाईकोर्ट के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘अमेजिंग इंडिया’ कार्यक्रम में न्यायपालिका की भूमिका पर बोलते हुए कहा, “अगर उच्चतम न्यायालय ने इंदिरा गांधी की तानाशाही के सामने सिर नहीं झुकाया होता, तो आपातकाल की स्थिति ही उत्पन्न नहीं होती। हमारा देश बहुत पहले ही तरक्की कर चुका होता।’’

इससे पहले, उन्होंने राज्य स्तरीय सम्मेलन में न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए हाल ही में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों की महत्वता पर जोर दिया। भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने वाले नए कानूनों को क्रांतिकारी करार देते हुए धनखड़ ने कहा, “ये कानून औपनिवेशिक मानसिकता से छुटकारा दिलाने के लिए हैं। ये हमारे द्वारा, हमारे लिए हैं।”

 

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