Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

पंपशाला की बेटी श्रुति छतरियां बनीं अदम्य साहस की प्रतीक

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

omdarpan-add
previous arrow
next arrow

 

 

  • घातक हादसे में दोनों हाथ गंवाने के बावजूद श्रुति ने दिखाई हिम्मत, पैरों से बांधी भाई को राखी

पंपशाला (कौशल संदुजा)


छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की पंपशाला की बेटी श्रुति छतरियां ने अपनी साहस और दृढ़ता से पूरे समाज को प्रेरित किया है। 4 मई 2024 को एक दुखद हादसे में अपने दोनों हाथ खोने के बावजूद, 11 वर्षीय श्रुति ने जीवन के हर मोर्चे पर हिम्मत और संकल्प दिखाया है। उस दिन, श्रुति अपनी मां के साथ कोतेवीरा मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन के बाद मामा के घर जा रही थी, जब एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने उनकी स्कूटी को पीछे से टक्कर मार दी। इस भयावह घटना में श्रुति के दोनों हाथ ट्रक के नीचे आ गए, और उन्हें बचाने के लिए डॉक्टरों को उसके दोनों हाथ काटने पड़े।

इस दर्दनाक हादसे के बाद, श्रुति का साहस और आत्मबल टूटने के बजाय और मजबूत हुआ। रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में इलाज के दौरान श्रुति ने अपनी तकलीफों को मात दी और अब वह बिना हाथ के सभी कार्य खुद से कर रही है। हाल ही में, श्रुति ने अपने पैरों से अपने भाई को राखी बांधकर साबित कर दिया कि उसका साहस अदम्य है।

समाजसेवी शांतनु शर्मा और कुंदन शर्मा ने श्रुति के साहस को सराहते हुए उसे समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बताया। उन्होंने कहा कि श्रुति छतरियां का जीवन उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो जीवन की छोटी-छोटी परेशानियों से हार मान लेते हैं। श्रुति ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।

omdarpanprmot-01
previous arrow
next arrow

Leave a Comment