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पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव व उनके भतीजे आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने लिया अंगदान का संकल्प, सामाजिक दायित्व का अनूठा उदाहरण

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  • रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से अंगदान, समाज के प्रति जवाबदेही का संदेश

अंबिकापुर (पंकज शुक्ला)।

पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव और उनके भतीजे आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने आज अपने सामाजिक दायित्व का पालन करते हुए अंगदान किया है। यह अंगदान रेडक्रॉस सोसायटी के आजीवन सदस्य आर्यन सिन्हा के माध्यम से किया गया, जिन्होंने अब तक 5000 से अधिक लोगों से अंगदान की प्रतिज्ञा प्राप्त की है।

अंगदान का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद टी.एस. सिंहदेव ने बताया कि यह समाज के प्रति उनकी जवाबदेही है। उन्होंने अंगदान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय समाज में अंतिम संस्कार और अन्य परंपराओं के कारण अंगदान के प्रति एक हिचक है। लेकिन मृत्यु के बाद यदि किसी जरुरतमंद को शरीर के अंग उपलब्ध कराए जा सकते हैं, तो यह एक महान कार्य होगा। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ में अंगदान से संबंधित संस्थाओं की कमी को महसूस किया और रोटा और सोटा जैसी संस्थाओं को राज्य में सक्रिय करने का प्रयास किया। इसके साथ ही, उन्होंने छत्तीसगढ़ में टिश्यू बैंक की भी स्थापना की, जिससे अंगदान की प्रक्रिया को और भी सुलभ बनाया जा सके।

आर्यन सिन्हा, जो रेडक्रॉस सोसायटी के आजीवन सदस्य हैं, ने बताया कि विगत तीन वर्षों से वे रक्तदान महादान-अंगदान महादान कार्यक्रम चला रहे हैं। वे इस क्षेत्र में कार्य करने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं, और उनकी पहल से अब तक 10 लोगों के अंगदान भी प्राप्त हो चुके हैं। इस माह के प्रारंभ में उन्होंने जयपुर में आयोजित एक कांक्लेव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व भी किया था।

अंगदान के महत्व को समझाते हुए टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि एक ऑख की कोर्निया उत्तक से दो लोगों को नेत्र ज्योति प्राप्त हो सकती है, जो समाज के प्रति हमारे कर्तव्यों को दर्शाता है। ब्रेनडेड होने पर मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रमाणित किए जाने के बाद अंगदान की प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें लिवर, किडनी, हृदय, फेफड़े, आदि अंगों को विशेष सर्जरी दल द्वारा निकाला जाता है।

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