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कर्मचारियों की मूक मजबूरी
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स्वास्थ्य मंत्रालय की चुप्पीऔर मरीजों के लिए बढ़ती चुनौतियां
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के DKS सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कार्यरत ठेका कर्मचारियों ने अनेक समस्याओं को बयां करते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सालों से चली आ रही उनकी अनदेखी, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की चुप्पी, और मरीजों की असुरक्षा का मामला अब एक बड़ा मुद्दा बन रहा है।
कर्मचारियों की अनदेखी: एक गंभीर संकट
छह वर्षों से आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत वार्ड ब्वॉयों द्वारा उठाए गए गंभीर आरोप बताते हैं कि उन्हें उनकी भूमिका से बाहर के कार्यों में लगाया जा रहा है। पंकज ठाकुर का कहना है, “गैस प्लांट में सिलेंडर उठाते समय मेरा हाथ फैक्चर हुआ, लेकिन अस्पताल में मुझे उचित चिकित्सा नहीं मिली।”
गितेश्वर साहू को भी गंभीर चोटें आई हैं, और डॉक्टरों ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी है। इन कर्मचारियों को 8600 रुपये मासिक वेतन पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो उनकी मेहनत और काम की गंभीरता के हिसाब से बहुत कम है।
संक्रमण का खतरा: स्वास्थ्य पर असर
कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें उसी यूनिफार्म में गंभीर मरीजों की देखभाल करनी पड़ती है, जिसमें वे कचरा उठाते हैं। गितेश्वर साहू ने चिंता जताई, “इससे हमें और मरीजों को संक्रमण का खतरा बढ़ता है।”
मरीजों का दर्द: सुविधाओं की कमी
डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। मरीजों को लंबे इंतज़ार का सामना करना पड़ता है, साथ ही बुनियादी सुविधाओं की कमी भी एक चिंतनीय पहलू है। मरीजों के रिश्तेदारों का कहना है कि अस्पताल में मौजूदा अव्यवस्थाएं उन्हें अक्सर परेशान करती हैं।
अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि मरीजों को बार-बार मिलने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है, लेकिन ऐसे में वार्ड ब्वॉयों को बाहरी कामों में लगाना और भी अधिक चिंता का विषय है।
स्वास्थ्य मंत्री की अनसुनी: कब तक?
कर्मचारियों ने कई बार स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से अपनी समस्याओं के बारे में पत्र लिखा है, लेकिन किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनकी आवाज़ें अनसुनी होने से कर्मचारियों में भय और निराशा फैल रही है।
क्या अब भी इंतजार करना होगा?
अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर स्थिति पर ध्यान देगा या ऐसी मनमानी जारी रहेगी। क्या कर्मचारियों की सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
उठते सवाल:
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कर्मचारियों की सुरक्षा:
- क्या अस्पताल प्रशासन ने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस प्रोटोकॉल लागू किए हैं?
- क्या ये कार्य वास्तव में वार्ड ब्वॉयों की जिम्मेदारी हैं, या उन्हें गैर-कानूनी रूप से इन कामों में लगाया जा रहा है?
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स्वास्थ्य मंत्री की अनसुनी:
- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान क्यों नहीं किया?
- क्या सरकार इन समस्याओं को गंभीरता से ले रही है, या इसे नजरअंदाज किया जा रहा है?
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मरीजों की देखभाल:
- मरीजों को समय पर देखभाल क्यों नहीं मिल रही है, जबकि कर्मचारियों को बाहरी कार्यों में लगाया जा रहा है?
- क्या मौजूदा व्यवस्थाएं मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रही हैं?
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वेतन और कार्य की स्थिति:
- क्या 8600 रुपये का वेतन कर्मचारियों की मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप है?
- ठेका कर्मचारियों के लिए बेहतर काम करने की परिस्थितियाँ कब तक बनी रहेंगी?
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अस्पताल की व्यवस्था:
- अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी को कब तक नजरअंदाज किया जाएगा?
- क्या प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में असमर्थ है, और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?










