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मुख्यमंत्री साय ने सुशासन संवाद में दिए कड़े निर्देश: नवाचारों को व्यवहारिक बनाएं, लोक सेवा में देरी पर होगी कार्रवाई

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रायपुर | 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय के पंचम तल स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित ‘सुशासन संवाद’ कार्यक्रम में अधिकारियों को सुशासन और जवाबदेही पर कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टरों को नवाचारों को व्यवहारिक बनाने, नागरिकों की सुविधा बढ़ाने और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत सेवाओं में देरी पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

नवाचार जनसेवा के केंद्र में हों

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवाचार तुगलकी प्रयोग नहीं, बल्कि नागरिक जीवन को सरल बनाने का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी नवाचार व्यवहारिक हों, दीर्घकालिक लाभ दें और शासन की फ्लैगशिप योजनाओं को सहयोग करें। कलेक्टरों को नवाचारों में जनता की राय शामिल करने और उनके प्रभाव का फीडबैक लेने के निर्देश भी दिए गए।


लोक सेवा में देरी पर अब सख्त कार्रवाई

लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी सेवा में देरी होने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगली समीक्षा बैठक में समय पर सेवाओं के निराकरण की स्थिति और कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

ई-ऑफिस और कार्यालयीन अनुशासन पर जोर

मुख्यमंत्री ने ई-ऑफिस प्रणाली को सुशासन का प्रमुख माध्यम बताते हुए सभी विभागों को इसे शत-प्रतिशत लागू करने की समय सीमा तय की। उन्होंने कहा कि मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता कम कर सभी लंबित फाइलों को डिजिटल किया जाए।
‘पुराने दस्तावेज हटाओ’ अभियान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कार्यालयों में स्वच्छता, पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने पर बल दिया।

शिकायतों का पारदर्शी निराकरण और फील्ड विजिट

मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिया कि जन शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी निराकरण प्रशासन की स्थायी प्रक्रिया बने। कलेक्टरों को प्राथमिकता के आधार पर शिकायतों को डिजिटल माध्यम में सूचीबद्ध करने और निराकरण की स्थिति सार्वजनिक करने को कहा गया।
उन्होंने फील्ड विजिट को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि नियमित प्रक्रिया बनाने पर बल दिया, ताकि योजनाओं की सच्चाई और वास्तविक प्रभाव का आकलन हो सके।

मुख्य सचिव ने नई कार्य संस्कृति का आह्वान

मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि ब्यूरोक्रेसी को अब नई कार्य संस्कृति और तकनीक को अपनाना होगा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुशासन और कार्यकुशलता का उदाहरण प्रस्तुत करने का आह्वान किया।

जिलों के नवाचार और ‘कॉफी टेबल बुक’ का विमोचन

कार्यक्रम में रायपुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, जशपुर और उदंती वन अभयारण्य के नवाचार प्रस्तुत किए गए। मुख्यमंत्री ने इन पर आधारित ‘कॉफी टेबल बुक’ का विमोचन किया और अधिकारियों की सराहना की।
‘जशप्योर’ ब्रांड, ‘महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’, नारायणपुर का डेटा प्लेटफॉर्म, दंतेवाड़ा की ब्लॉकचेन पहल और रायपुर की ‘टीम प्रहरी’ जैसी पहल को उत्कृष्ट बताया गया।

सुशासन निरंतर सुधार की प्रक्रिया

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन कोई एक दिन का लक्ष्य नहीं, बल्कि निरंतर सुधार की प्रक्रिया है। उन्होंने अधिकारियों से छोटे-छोटे बदलावों से छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित भारत की अग्रिम पंक्ति में लाने का संकल्प लेने को कहा।

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