सुकमा (ओमदर्पण न्यूज़)।
छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में लौट रहे आत्मसमर्पित युवाओं को अब सीधे लोकतंत्र से जोड़ने की दिशा में सुकमा जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक पहल की है। जिले के पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 हितग्राहियों का मतदाता परिचय पत्र (वोटर आईडी कार्ड) बनाकर उन्हें मतदान का संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित किया गया है।
जिला प्रशासन के इस सकारात्मक कदम के बाद अब ये पुनर्वासित युवा न केवल अपने मताधिकार का प्रयोग कर पंच, सरपंच, जनपद व जिला पंचायत सदस्य और विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का चयन कर सकेंगे, बल्कि भविष्य में वे स्वयं भी चुनाव लड़ने के पात्र बन गए हैं। इस बदलाव को उनके जीवन में सम्मान, अधिकार और आत्मविश्वास की एक नई शुरुआत माना जा रहा है।
सरकारी योजनाओं का मिल रहा सीधा लाभ
जिला प्रशासन के अनुसार, शासन की नक्सल पुनर्वास नीति का लाभ आत्मसमर्पित युवाओं को लगातार दिया जा रहा है। बुनियादी सुविधाओं और पहचान को पुख्ता करते हुए, पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 हितग्राहियों के राशन कार्ड, जॉब कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड और श्रम कार्ड के पंजीयन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही, उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का सर्वे भी कराया गया है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलना तय हो गया है।
कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
पुनर्वासित युवाओं को समाज में एक नई पहचान और रोजगार देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा उन्हें विभिन्न प्रकार के कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) भी प्रदान किए जा रहे हैं।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 317 पुनर्वासित युवा कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इनमें:
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कृषि उद्यमिता प्रशिक्षण में 48 हितग्राही
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सिलाई मशीन प्रशिक्षण में 5 हितग्राही
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कृषि उद्यमी एवं राजमिस्त्री प्रशिक्षण में 265 हितग्राही
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वाहन चालक प्रशिक्षण में 14 हितग्राही
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मुर्गी पालन प्रशिक्षण में 25 हितग्राही शामिल हैं।
जिला प्रशासन की यह पहल न केवल मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं को नई पहचान और अधिकार दिला रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की ओर भी अग्रसर कर रही है।









