रायपुर, ओम दर्पण।
परीक्षा शुल्क वृद्धि को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी अभाविप रायपुर महानगर ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। अभाविप ने परीक्षा शुल्क, अंकसूची सत्यापन शुल्क और अन्य शैक्षणिक शुल्कों में की गई वृद्धि को छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाला निर्णय बताया है।
अभाविप ने कहा कि शासकीय विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और किफायती शिक्षा उपलब्ध कराना होता है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हाल ही में लिए गए निर्णय शिक्षा के बढ़ते व्यापारीकरण को बढ़ावा देने वाले हैं।
परीक्षा शुल्क सीधे ₹1580 किया गया
अभाविप के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेमेस्टर परीक्षा शुल्क ₹1075 और वार्षिक परीक्षा शुल्क ₹1085 को बढ़ाकर सीधे ₹1580 कर दिया है। परिषद ने इसे लगभग 46 प्रतिशत की एकमुश्त वृद्धि बताते हुए कहा कि यह गरीब, मध्यमवर्गीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा करेगा।
परिषद ने आगामी सत्रों में प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत शुल्क वृद्धि के प्रावधान पर भी आपत्ति जताई है। अभाविप का कहना है कि यह निर्णय बताता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के हितों की अपेक्षा राजस्व वृद्धि को प्राथमिकता दे रहा है।
सत्यापन शुल्क ₹5000 करने पर आपत्ति
अभाविप ने अंकसूची और पाठ्यक्रम सत्यापन शुल्क को बढ़ाकर ₹5000 किए जाने के निर्णय पर भी गंभीर आपत्ति व्यक्त की है। परिषद के अनुसार नौकरी, उच्च शिक्षा या अन्य शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए सत्यापन की आवश्यकता पड़ने वाले विद्यार्थियों और भूतपूर्व छात्रों के लिए इतनी बड़ी राशि देना अत्यंत कठिन होगा।
इसी तरह उपाधि प्रमाण पत्र प्राप्त करते समय नाम या अन्य विवरणों में सुधार के लिए ₹500 शुल्क निर्धारित करने को भी अभाविप ने अनुचित बताया है। परिषद का कहना है कि कई मामलों में त्रुटियां विश्वविद्यालय स्तर की लिपिकीय गलतियों के कारण होती हैं, जिसका आर्थिक भार विद्यार्थियों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
छात्रों के हितों से समझौता नहीं: सुजल गुप्ता
अभाविप रायपुर महानगर मंत्री सुजल गुप्ता ने कहा कि पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर्णय छात्रों के हितों पर सीधा प्रहार है। एक ओर देश में उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ाने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा शुल्क वृद्धि, प्रतिवर्ष शुल्क बढ़ाने के निर्णय और अन्य बढ़े हुए शुल्कों को अभाविप किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। छात्रों के हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
निर्णय वापस नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
अभाविप ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि परीक्षा शुल्क वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत शुल्क वृद्धि के निर्णय को निरस्त किया जाए, अंकसूची और पाठ्यक्रम सत्यापन शुल्क को युक्तिसंगत बनाया जाए तथा नामांकन एवं पंजीयन सुधार शुल्क को समाप्त किया जाए।
परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि छात्र हितों की अनदेखी करते हुए इन जनविरोधी निर्णयों को वापस नहीं लिया गया तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्र समुदाय के साथ व्यापक और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
ज्ञापन में मुख्य रूप से प्रदेश सह मंत्री प्रथम फूटाने, महानगर सह मंत्री आशीष, मन, शीतल, सुनाए, संकल्प, निखिल, भागीरथी एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।










