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कबाड़ से जुगाड़: अनुपयोगी वस्तुओं से सजी भिलाई की सुंदरता

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भिलाईनगर (रवि कुमार भास्कर)।

घरों, दुकानों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले कई प्रकार के कचरे को आमतौर पर अनुपयोगी मान लिया जाता है, लेकिन अब यही कबाड़ शहर की सुंदरता बढ़ाने का काम कर रहा है। नगर निगम भिलाई के निर्देशन में अनुपयोगी वस्तुओं को नवाचार के जरिए उपयोगी बनाया जा रहा है। उद्यानों, एस.एल.आर.एम. सेंटर और मुख्य कार्यालयों में ऐसी सामग्रियों का इस्तेमाल कर आकर्षक सजावटी और उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा रही हैं।

क्रिएटिविटी से कबाड़ को बनाया उपयोगी

इस पहल के अंतर्गत पुराने टायरों से गमले, झूले और सोफे बनाए जा रहे हैं। पानी की बोतलों से सजावटी सामान, पेन स्टैंड, झरने और गमले तैयार किए जा रहे हैं। खेल सामग्री, नारियल के खोल से झूमर और गमले, जुट के बोरे से झोले और पुराने नलों से सजावटी सामान बनाकर शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाए जा रहे हैं। ये सभी वस्तुएं बेहद कम लागत में बनाई जा रही हैं और आकर्षक भी दिखती हैं।

विशेष रूप से टायर से बना झूला इतना मजबूत और आरामदायक है कि इसे देखकर किसी का भी झूलने का मन कर जाए।

नगर निगम आयुक्त ने की सराहना

नगर निगम भिलाई के आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय ने जब इन नवाचारों को देखा, तो वे भी हैरान रह गए। निगम ने कुसुम कानन गार्डन, जिम गार्डन, भारत माता गार्डन, शंकरा उद्यान, एस.एल.आर.एम. सेंटर और कार्यालयों में इन वस्तुओं को स्थापित किया है।

उद्यान अधिकारी तिलेश्वर साहू और एस.एल.आर.एम. सेंटर की महिला समूह इस पहल को मूर्त रूप दे रही हैं। इनकी मेहनत और रचनात्मकता से यह कबाड़ ऐसा रूप ले रहा है कि पहली नजर में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कभी यह अनुपयोगी था।

नवाचार से स्वच्छता और सौंदर्यकरण को बढ़ावा

यह पहल केवल स्वच्छता ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और शहर के सौंदर्यीकरण को भी बढ़ावा दे रही है। इस प्रकार के नवाचार से शहर के कचरे का पुनर्चक्रण संभव हो पा रहा है और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है।

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