13 सितम्बर 2026 |
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मुक्तिधाम की बदहाली पर हाईकोर्ट नाराज, चीफ जस्टिस ने खुद लिया संज्ञान

OM Darpan

Sep 30, 2025 11:29 pm 233 views
मुक्तिधाम की बदहाली पर हाईकोर्ट नाराज, चीफ जस्टिस ने खुद लिया संज्ञान
  बिलासपुर।  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा ने बिलासपुर जिले के बिल्हा स्थित ग्राम रहंगी के मुक्तिधाम की अव्यवस्था और गंदगी को देखकर स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने इसे जनहित याचिका मानकर सुनवाई की और राज्य सरकार, कलेक्टर तथा ग्राम पंचायत को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मुक्तिधाम की बदहाली देख हैरान हुए चीफ जस्टिस

मामला रविवार (28 सितंबर) का है। हाईकोर्ट के एक न्यायिक अधिकारी के पिता का निधन हो गया था। उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा बिलासपुर के बिल्हा ब्लॉक के ग्राम रहंगी स्थित मुक्तिधाम पहुंचे थे। वहां की स्थिति देखकर वे हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि मुक्तिधाम में कोई बाउंड्रीवॉल या फेंसिंग नहीं है। पहुंचने का रास्ता गड्ढों से भरा है और बारिश में पानी भर जाने से लोगों को पहुंचने में मुश्किल होती है। जगह-जगह झाड़ियां और जंगली घास है, जहां सांप और जहरीले कीड़ों के होने की आशंका बनी रहती है।

साफ-सफाई का अभाव और बिखरा कचरा

मुक्तिधाम में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं थी। अंतिम संस्कार के बाद फेंके गए कपड़े, पॉलीथिन, शराब की बोतलें और अन्य कचरा इधर-उधर बिखरा पड़ा था। कचरा फेंकने के लिए डिब्बा तक उपलब्ध नहीं था। इस बदहाली को देखते हुए चीफ जस्टिस ने जनहित याचिका मानकर मामले पर संज्ञान लिया।

दशहरा अवकाश के बीच जनहित याचिका पर सुनवाई

हालांकि इन दिनों हाईकोर्ट में दशहरा पर्व की छुट्टी चल रही है, बावजूद इसके चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि मृत्यु के बाद शव का सम्मानजनक विदाई संवैधानिक और मौलिक अधिकार है।

हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी, दिए सख्त निर्देश

कोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार, कलेक्टर और ग्राम पंचायत को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति स्वर्गवासी होता है, तो उसके पार्थिव शरीर को सम्मानजनक विदाई मिलनी चाहिए। यह कोई वस्तु नहीं कि अमानवीय तरीके से निपटाया जाए। परिवार और रिश्तेदार भावनाओं से जुड़े होते हैं और वे शांत वातावरण में विदाई चाहते हैं।

सम्मानजनक विदाई संवैधानिक अधिकार: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता की व्यवस्था करना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसा न करना संविधान, नगरपालिका अधिनियम और पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसी स्थिति पूरे राज्य, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में है, जहां मुक्तिधाम को सबसे कम प्राथमिकता दी जाती है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, पंचायत सचिव और बिलासपुर के कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथ पत्र देने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
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