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पांचवीं तक पढ़ी शिमला अब खुद ले रहीं बड़े फैसले
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जेसीबी से सुधारा खेत और ‘बीज राखी’ से कर रही हैं एक्स्ट्रा कमाई।
✍️ विशेष संवाददाता
रायगढ़ | रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत कोईलार में रहने वाली शिमला राठिया आज महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं। कभी पांचवीं तक की शिक्षा प्राप्त कर घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली शिमला आज न केवल आत्मविश्वास से लबरेज हैं, बल्कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसले भी स्वयं ले रही हैं। उनके इस बड़े बदलाव के पीछे महतारी वंदन योजना की 30 किस्तों से मिली आर्थिक मदद और ‘बिहान’ समूह से उनका जुड़ाव मुख्य आधार बना है।
*** खेती में निवेश और स्वरोजगार से बढ़ी आय ***
शिमला राठिया ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का उपयोग केवल घर के खर्चों में न करके दूरदर्शिता दिखाई है। उन्होंने करीब 10 हजार रुपये खर्च कर जेसीबी से अपने खेत का समतलीकरण और सुधार कराया है, जिससे अब उन्हें बेहतर फसल उत्पादन और आय में वृद्धि की उम्मीद है। वर्तमान में वह पर्यावरण हितैषी ‘बीज राखी’ बनाने का कार्य भी कर रही हैं। इस अतिरिक्त आमदनी से उन्होंने आने वाले रक्षाबंधन पर अपने भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीदने की पूरी तैयारी कर ली है।
*** आत्मविश्वास में वृद्धि और शिक्षा की नई राह ***
‘बिहान’ से जुड़ने के बाद शिमला के व्यक्तित्व में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। समूह की गतिविधियों ने उन्हें घर से बाहर निकलने और नए अनुभव हासिल करने का मौका दिया। जो शिमला पहले कभी अकेले बाहर निकलने में झिझकती थीं, वह अब काम के सिलसिले में बड़े शहरों तक अकेले यात्रा करती हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी अधूरी शिक्षा को भी आगे बढ़ाने की ठानी है। शिमला अपनी इस आर्थिक आत्मनिर्भरता और प्रगति के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करती हैं।








