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मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित और धान के साथ अन्य फसलों पर दिया जोर
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सिंचाई परियोजनाओं के लिए करोड़ों की स्वीकृति और बस्तर में सुरक्षा कैंप बनेंगे अब सेवाडेरा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में आयोजित ‘किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम’ विषयक संवाद कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को उत्कृष्ट खेती और नवाचार के लिए सम्मानित किया। कार्यक्रम में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन और राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसान परिवार में जन्म लेने के कारण उन्होंने खेती की चुनौतियों को करीब से देखा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई किसान क्रेडिट कार्ड योजना को ऐतिहासिक बताया।
साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है। पिछले सीजन में 25 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
सिंचाई और तकनीक पर बड़ा निवेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए नई परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। बस्तर की इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव में 2 हजार करोड़ की लागत से बैराज बनाए जाएंगे।
सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना के लिए 3 हजार करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा धान के बदले अन्य फसलें उगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता दी जाएगी।
बस्तर में शांति और विकास का उदय
नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद बस्तर में विकास की नई धारा बह रही है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जिन 70 सुरक्षा कैंपों की अब जरूरत नहीं है उन्हें ‘सेवाडेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
नेतानार स्थित सेवाडेरा में इमली की पैकेजिंग का काम शुरू हो चुका है। आधुनिक तकनीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं ‘ड्रोन दीदी’ बनकर नैनो डीएपी का छिड़काव कर रही हैं और बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।
भविष्य की योजनाओं पर सरकार का फोकस
राज्य की नई उद्योग नीति के तहत अब तक 8 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए जा चुके हैं। इससे सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ रेल अधोसंरचना का भी विस्तार किया जा रहा है। खरसिया-परमलकसा रेल लाइन को स्वीकृति मिल गई है और लंबे समय से लंबित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना भी अब जल्द ही साकार होने जा रही है।









