केंद्रीय जेल अंबिकापुर में खुली प्रदेश की पहली फैमिली ओपन जेल, परिवार के साथ रह सकेंगे बंदी
OM Darpan
अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ शासन के सेवा संकल्प अभियान के तहत अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर केंद्रीय जेल अंबिकापुर में प्रदेश की पहली 'परिवार खुली जेल' (फैमिली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन) की शुरुआत की गई है। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने इस सुधारात्मक पहल का शुभारंभ किया।
इस व्यवस्था के तहत प्रारंभिक चरण में दो बंदी अपने परिवार के साथ रह सकेंगे। इसके लिए अंबिकापुर जेल परिसर में मौजूद अधोसंरचना का ही इस्तेमाल किया गया है। योजना के अनुसार, बंदी सुबह अपने काम के सिलसिले में जेल से बाहर निकलेंगे और शाम को लॉकअप का समय होने से पहले वापस लौट आएंगे।
जेल प्रशासन पहले महीने बंदियों और उनके परिवार के लिए राशन की व्यवस्था करेगा। इसके बाद बंदियों को खुद रोजगार कर अपना खर्च उठाना होगा। इसके लिए जेल विभाग उन्हें रोजगार के अवसर और साधन भी उपलब्ध कराएगा।
गंभीर अपराध के बंदियों को नहीं मिलेगा मौका
जेल विभाग के अनुसार, इस योजना का फायदा हर कैदी को नहीं दिया जाएगा। गंभीर धाराओं में सजा काट रहे कैदी इसके दायरे में नहीं आएंगे। केवल उन्हीं बंदियों का चयन होगा, जिनका जेल में आचरण पूरी तरह साफ-सुथरा रहा हो और जो किसी भी अनुशासनहीनता में शामिल न रहे हों। पात्र बंदियों की सूची तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी, जहाँ से अंतिम अनुमोदन के बाद ही प्रवेश मिलेगा।
इस पहल की मुख्य बात यह है कि कैदी की पत्नी का जेल में निरुद्ध होना जरूरी नहीं है। बाहर रहने वाली पत्नी भी जेल परिसर में बने इस ओपन शेल्टर में अपने कैदी पति के साथ रह सकेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे परिवारों को बिखरने से रोकने और बंदियों के सामाजिक पुनर्वास में मदद मिलेगी।
बंदियों ने भेंट किया पोर्ट्रेट
केंद्रीय कारागार अंबिकापुर में 'सरगुजा स्कूल ऑफ आर्ट्स' का संचालन किया जा रहा है, जहाँ कैदी कला का प्रशिक्षण ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान बंदियों ने अपने हाथों से तैयार किया गया जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता का पोर्ट्रेट उन्हें भेंट किया। इस दौरान जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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