26 सितम्बर 2026 |
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पीडीएस दुकानों से शक्कर गायब, 60 से 70 रुपए किलो खरीदने को मजबूर उपभोक्ता; कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी

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OM Darpan

Sep 26, 2026 04:58 pm 675 views
पीडीएस दुकानों से शक्कर गायब, 60 से 70 रुपए किलो खरीदने को मजबूर उपभोक्ता; कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी

बस्तर-सरगुजा में महीनों से चना-गुड़ बंद होने का आरोप, सप्लाई चेन ठप होने पर प्रभावित परिवारों के नुकसान की भरपाई की मांग

रायपुर।

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छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत संचालित उचित मूल्य की दुकानों से शक्कर गायब होने के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में शक्कर उपलब्ध न होने से हितग्राहियों को खुले बाजार से 60 से 70 रुपए प्रति किलो की दर से महंगी शक्कर खरीदनी पड़ रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राशन व्यवस्था में आई इस गड़बड़ी को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश की सभी राशन दुकानों में तत्काल शक्कर का नियमित वितरण बहाल नहीं किया गया, तो पार्टी सड़क से लेकर विधानसभा के सदन तक उग्र आंदोलन करेगी।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि साय सरकार गरीबों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। सरकारी दावों के विपरीत आज राज्य भर की हजारों राशन दुकानों से शक्कर का स्टॉक नदारद है। शक्कर न मिलने से रोजमर्रा के उपभोग के साथ-साथ त्यौहारों के समय आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के राशनकार्ड धारकों को निर्बाध राशन सामग्री देने की बात केवल कागजी साबित हो रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि राशन केंद्रों से गरीब परिवारों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

सप्लाई चेन ठप और टेंडर प्रक्रिया में देरी का आरोप

राशन वितरण व्यवस्था के संकट पर पार्टी का कहना है कि खाद्य आपूर्ति से जुड़ी पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सप्लाई चेन का ठप होना और टेंडर प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी सरकार की प्रशासनिक अक्षमता और नाकामी को सीधे तौर पर उजागर करती है।

प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि सरकार का ध्यान आम जनता और गरीबों के राशन की बुनियादी चिंता करने के बजाय केवल प्रचार-प्रसार तक सीमित रह गया है। प्रशासनिक स्तर पर समय रहते आवश्यक निर्णय न लिए जाने के कारण वितरण तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हुआ है। शक्कर का वितरण न होने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का घरेलू बजट बिगड़ चुका है। उन्होंने कहा कि पहले से महंगाई की मार झेल रहे परिवारों को रोजमर्रा के उपयोग और पर्वों के लिए बाजार से 60 से 70 रुपए प्रति किलो की दर से महंगी शक्कर खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर गरीबों की जेब और उनके बजट पर डाका डालने जैसा है।

बस्तर और सरगुजा में चना व गुड़ की आपूर्ति भी प्रभावित

कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि राशन संकट केवल मैदानी इलाकों की शक्कर तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुसूचित और दूरदराज के क्षेत्रों में भी वितरण प्रणाली पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। बस्तर और सरगुजा संभाग के राशन कार्डधारियों को पिछले कई महीनों से चना और गुड़ का वितरण नहीं किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में गरीब परिवारों को पोषण और पारंपरिक खान-पान से जुड़ी आवश्यक वस्तुएं नहीं मिल पा रही हैं।

उन्होंने पूर्ववर्ती व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का संचालन पारदर्शी तरीके से किया जाता था। उस समय राशन दुकानों तक नमक, चावल, शक्कर के साथ-साथ चना और गुड़ का समयबद्ध और नियमित आवंटन सुनिश्चित रहता था। इसके विपरीत, वर्तमान व्यवस्था में गरीबों को उनके निर्धारित हक से वंचित किया जा रहा है। पीडीएस केंद्रों में आवश्यक वस्तुओं की अनुपलब्धता से सरकार की नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लाखों प्रभावित परिवारों के नुकसान की भरपाई की मांग

कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि राशन दुकानों में समय पर सामान न भेजकर जमाखोरों और कालाबाजारियों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया जा रहा है। प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने पूछा कि जब राशन दुकानों में शक्कर नहीं होगी और लोग खुले बाजार से महंगे दामों पर सामान खरीदने को विवश होंगे, तो इसका सीधा आर्थिक फायदा मुनाफाखोरों को मिलेगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि जो सरकार गरीब जनता को राशन दुकानों से समय पर जरूरी शक्कर तक उपलब्ध नहीं करा सकती, उसे सुशासन का दावा करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। राशन व्यवस्था का ठप होना केवल प्रशासनिक लापरवाही है या इसके पीछे कोई बड़ा भ्रष्टाचार चल रहा है, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि मुख्यमंत्री यह स्पष्ट करें कि प्रदेश के जिन लाखों परिवारों को राशन न मिलने के कारण बाजार से महंगी शक्कर खरीदनी पड़ी है, उनके इस आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि राशन वितरण व्यवस्था में तत्काल सुधार कर शक्कर का वितरण शुरू नहीं कराया गया, तो कांग्रेस प्रदेशव्यापी स्तर पर उग्र आंदोलन छेड़ेगी।

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