आंधी का भीषण तांडव : पीठाआमा में कुदरत ने बरपाया कहर, आशियाने उजड़े और करोड़ों की मिल हुई ज़मींदोज़
OM Darpan

पत्थलगांव के सुखवासुपारा में मकानों के उड़े छप्पर, श्री श्याम एग्रोटेक को भारी चपत, धान की फसल पूरी तरह बर्बाद
✍️ विशेष संवाददाता
कोतबा | जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड में कुदरत ने ऐसा तांडव मचाया कि पूरा इलाका सहम गया। ग्राम पंचायत पीठाआमा में 10 तारीख की दोपहर आए भीषण आंधी-तूफान ने भारी तबाही का मंजर उजागर किया है। दोपहर 2:00 से 3:00 बजे के बीच आई इस आपदा ने न केवल ग्रामीणों के सिर से छत छीन ली, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की कमर भी तोड़ दी। सुखवासुपारा सहित आसपास के इलाकों में आंधी का वेग इतना प्रचंड था कि करोड़ों का निवेश पल भर में मलबे में तब्दील हो गया।
तिनके की तरह उड़े आशियाने, बेघर हुए ग्रामीणों पर टूटा दुखों का पहाड़
तूफान की मार से सुखवासुपारा के दर्जनों परिवारों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। लुथरो राम तुर्री, रोशन मरियानुस खड़िया और मंगल साय जैसे कई ग्रामीणों के मकानों के छप्पर और शेड हवा में तिनके की तरह उड़ गए। कुकराझार, ईमली पारा और तुरीपारा में भी आंधी ने जमकर तबाही मचाई है। घरों के साथ-साथ प्राकृतिक संपदा को भी करारी चोट पहुंची है। भारी-भरकम इमली, महुआ, कोसम, साजा और आम के पेड़ जड़ से उखड़ गए, जिससे कई रास्ते बंद हो गए और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
करोड़ों का एग्रोटेक प्लांट तबाह, खुले आसमान के नीचे आया अनाज
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बेनकाब मंजर 'श्री श्याम एग्रोटेक' राइस मिल में देखने को मिला। तूफान की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मिल परिसर का विशालकाय नीला टिन शेड लोहे के मजबूत एंगल्स के साथ उखड़ कर दूर जा गिरा। मिल संचालक राहुल निंगानिया के मुताबिक, मिल के अंदर और बाहर रखा करोड़ों का धान और चावल बारिश में भीगने से पूरी तरह खराब हो गया है। मशीनों के खुले आसमान के नीचे आने और स्टॉक की बर्बादी ने मिल प्रबंधन को गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है।
खेतों में बिछी मेहनत, किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी
तूफान ने केवल व्यापार और घरों को ही नहीं, बल्कि अन्नदाताओं की उम्मीदों को भी बुरी तरह रौंद दिया है। कई एकड़ में लहलहाती धान की फसल खेतों में ही बिछ गई है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट की आशंका पैदा हो गई है। फसल के बर्बाद होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। अब पीठाआमा के ग्रामीण, किसान और व्यवसायी प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि नुकसान का त्वरित सर्वे कर उन्हें मुआवजा प्रदान किया जाए।
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