13 सितम्बर 2026 |
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कमरछठ पूजा के लिए पसहर चावल की कीमतें आसमान छूईं, सुगंधित चावल से तिगुना महंगा

OM Darpan

Aug 23, 2024 10:51 pm 187 views
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  • भैंस के दूध, दही और घी की एडवांस बुकिंग, माताएं कमरछठ पूजा की तैयारी में जुटीं

नदक्ठ्ठी ((रोहितास सिंह भुवाल)। छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में कमरछठ पूजा की तैयारी जोरों पर है। इस पूजा में उपयोग किए जाने वाले पसहर चावल की मांग इतनी बढ़ गई है कि इसकी कीमत सुगंधित चावल से तिगुनी हो गई है। फिलहाल, पसहर चावल बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, और इसकी कीमत पूजा के दिन और भी बढ़ने की संभावना है। हलषष्ठी के इस पावन पर्व में माताएं अपने पुत्रों की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और पूजा में बिना हल जोते पैदा होने वाले पसहर चावल का विशेष महत्व होता है। पसहर चावल की पैदावार बेहद सीमित होती है क्योंकि यह खेतों में नहीं बल्कि नालों, तालाबों और पोखरों के किनारे अपने आप उगता है। दुर्गहीन ढीमर जैसी महिलाएं इसे साफ करके बाजार में बेचती हैं, जिससे इसकी कीमत में इजाफा होता है। पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य सामग्री की भी मांग तेजी से बढ़ रही है। भैंस के दूध, दही, और घी की एडवांस बुकिंग हो रही है, ताकि पूजा के दिन इनकी कमी न हो। महिलाओं का कहना है कि कमरछठ पूजा के लिए भैंस के दूध और उससे बने उत्पादों का उपयोग शुभ माना जाता है, इसलिए इनकी भी कीमतें आसमान छू रही हैं। शास्त्रों के अनुसार, भादो कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था, और उन्हीं के जन्मोत्सव के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। बलराम कृषि कार्यों में इस्तेमाल किए जाने वाले हल को शस्त्र के रूप में धारण करते थे, इसलिए इस दिन हल जोताई किए हुए अनाज का उपयोग वर्जित है। कमरछठ के महत्व और इसकी तैयारियों को देखते हुए बाजार में पसहर चावल और भैंस के दूध, दही, घी की बढ़ती मांग ने इसकी कीमतों में उछाल ला दिया है, जिससे बाजार में हलचल मची हुई है।
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