25 वर्षों का लंबा इंतजार खत्म: नवा रायपुर में खुलेगा प्रदेश का पहला सरकारी होम्योपैथी कॉलेज, डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री का जताया अभार
OM Darpan
इसी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होगी पढ़ाई, बीएचएमएस की 63 सीटों पर नीट मेरिट के आधार पर मिलेगा प्रवेश; आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि
रायपुर।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार प्रदेश को अपना पहला सरकारी होम्योपैथी कॉलेज मिल गया है। यह नया संस्थान नवा रायपुर में स्थापित होने जा रहा है, जहां आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही कक्षाओं का संचालन और प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रदेश में आयुष चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में इस कदम को एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। सरकारी क्षेत्र में कॉलेज खुलने से उन सैकड़ों विद्यार्थियों को बड़ा लाभ मिलेगा, जो होम्योपैथी चिकित्सा के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं और प्रदेश के भीतर ही सस्ती व गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
15% सीटें अखिल भारतीय कोटे के लिए रहेंगी आरक्षित
नवा रायपुर स्थित इस नए सरकारी होम्योपैथी कॉलेज को नियामक संस्थाओं से प्रवेश के लिए विधिवत मंजूरी मिल चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यहां स्नातक स्तर के बीएचएमएस (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी) पाठ्यक्रम की कुल 63 सीटों पर दाखिला लिया जाएगा। प्रवेश की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) की मेरिट सूची के आधार पर पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएगी। इसमें से 15 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटे (All India Quota) के लिए निर्धारित रहेंगी, जबकि शेष सीटों पर राज्य के मूल निवासी अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा।
निजी कॉलेजों के बंद होने से खड़ा हुआ था संकट
प्रदेश में अब तक होम्योपैथी की पढ़ाई पूरी तरह से निजी कॉलेजों के भरोसे ही निर्भर थी। पूर्व में राज्य के भीतर तीन निजी होम्योपैथी कॉलेज संचालित किए जा रहे थे। हालांकि, समय के साथ रायपुर के राजेंद्र नगर स्थित महाराणा प्रताप होम्योपैथी कॉलेज और बिलासपुर का चौकसे होम्योपैथी कॉलेज बंद हो गए। वर्तमान में केवल रायपुर के रामकुंड में स्थित रायपुर होम्योपैथी कॉलेज ही संचालित हो रहा है, जहां महज 35 सीटें ही उपलब्ध हैं। सीमित सीटों और निजी संस्थानों की कमी के कारण राज्य के प्रतिभावान छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता था। ऐसे समय में सरकारी कॉलेज की स्थापना से सीट वृद्धि के साथ-साथ शिक्षा के नए अवसरों का विस्तार होगा।
चिकित्सा जगत में नई उम्मीद, मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री का जताया आभार
राज्य में पहले सरकारी होम्योपैथी संस्थान की सौगात मिलने पर चिकित्सा जगत और आयुष विशेषज्ञों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रति आभार व्यक्त किया है।
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से उभरते राज्य में एक सुदृढ़ सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की आवश्यकता बीते दो दशकों से महसूस की जा रही थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस नए संस्थान में केवल दाखिले तक सीमित न रहकर आधुनिक प्रयोगशालाएं, योग्य व अनुभवी प्राध्यापक, बेहतर क्लिनिकल ट्रेनिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान (Research) की उच्चस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराएगी, ताकि यहां से निकलने वाले चिकित्सक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती दे सकें।
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