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विचारों से आते हैं संस्कार, सुविधाओं से नहीं: अशवंत तुषार साहू

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  • महाभारत का उदाहरण देकर बताया कैसे योग्य बनाएं बच्चों को

 

महासमुंद।


महासमुंद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पसीद में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाजपा किसान नेता अशवंत तुषार साहू शामिल हुए। आयोजन समिति के तत्वाधान में तुषार साहू का भव्य स्वागत किया गया। अपने उद्बोधन में साहू ने बच्चों की परवरिश और संस्कारों के विषय पर गहन चर्चा की, जिसका मुख्य बिंदु यह था कि परिवार में संतानों को अच्छे संस्कार देना सबसे मुश्किल काम है, और इसमें भौतिक सुविधाओं की भूमिका सीमित होती है।

सुविधाओं की अधिकता पर उठाई चिंता

तुषार साहू ने कहा कि काफी माता-पिता बच्चों के लिए सभी सुविधाएं और साधन उपलब्ध करा देते हैं, बच्चों पर पूरा स्नेह लुटा देते हैं, फिर भी कई लोग अपनी संतान को अच्छे संस्कार नहीं दे पाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब बच्चे माता-पिता के प्रेम का लाभ उठाते हैं, तो गलती माता-पिता की ही होती है। बच्चों को पूरा दोष देना गलत होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पूरी तरह गलत है कि बच्चों को संस्कारी और योग्य बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा संसाधनों और पूंजी की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, अभाव में भी संतानों को योग्य बनाया जा सकता है।

महाभारत: पांडवों ने अभाव में पाए संस्कार

भाजपा किसान नेता ने अपनी बात को सिद्ध करने के लिए महाभारत का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि महाभारत में दो तरह की संतानें हैं: पहली कौरव, जो पूरे जीवन राजमहलों में रहे और सुविधाओं का उपभोग किया; और दूसरी पांडव, जिनका जन्म और लालन-पालन जंगल में हुआ। साहू ने बताया कि पांडु और माद्री के देह त्यागने के बाद कुंती ने पांडवों को अकेले जंगल में पाला। उन्होंने पांडवों को वो सारे संस्कार दिए जो कौरवों में राजकीय सुविधाओं के बावजूद नहीं थे।

उन्होंने कहा कि दुर्योधन और उसके 99 भाई, सभी कुसंस्कारी निकले। लेकिन युधिष्ठिर और उसके चारों भाई धर्मात्मा थे। साहू ने निष्कर्ष दिया कि कुंती ने अकेले पांडवों को वो संस्कार दिए जो भीष्म सहित सारे कौरव परिजन मिलकर भी कौरवों को महल में नहीं दे पाए। उन्होंने कहा, “अगर आप ये सोचते हैं कि सुविधाओं से बच्चों में संस्कार आते हैं तो यह गलत है। संस्कार हमारे विचारों से आते हैं।”

प्यार और अभावों से सुधरता है जीवन

तुषार साहू ने माता-पिता से अपील की कि वे हमेशा सिर्फ सुविधाओं की न सोचें। उन्होंने सलाह दी कि कभी-कभी उन्हें अभावों में भी रखने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अभावों में सुविधाओं के स्थान पर आपका प्यार और संस्कार बच्चों के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर संतानें कभी भटकेंगी नहीं, उनका जीवन सुधर जाएगा और वे हमेशा सुखी रहेंगे।

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