ननकट्ठी (रोहितास सिंह भुवाल)।
ननकट्ठी के समीप स्थित ग्राम मेडेसरा इन दिनों शिवभक्ति के महापर्व श्रावण के रंग में रंगा हुआ है। यहाँ का नजारा अद्भुत है—चारों ओर “हर हर महादेव” की गूंज और भक्तों का असीम श्रद्धा सागर। मेडेसरा की पहचान यहाँ स्थापित भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूपों से है, जो देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं।

एक ही धाम में 12 ज्योतिर्लिंग
देशभर में फैले सोमनाथ से लेकर रामेश्वरम तक के द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन अब मेडेसरा गांव में एक ही स्थान पर संभव हो पाए हैं। यह स्थल उन असंख्य श्रद्धालुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं, जो आर्थिक या भौगोलिक कारणों से मूल ज्योतिर्लिंगों की यात्रा नहीं कर पाते। यहाँ आकर भक्तगण शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
संकल्प से साकार हुआ सपना
यह अध्यात्मिक धरोहर ध्रुव कुमार शर्मा और सुनीता शर्मा के संरक्षण और मार्गदर्शन में साकार हुई। उन्होंने 15 जून 2014 को इस पवित्र कार्य को भगवान की प्रेरणा और जनसेवा का माध्यम मानते हुए इसे स्थापित किया। उनका यह प्रयास आज हजारों भक्तों की आस्था का केंद्र बन चुका है।
श्रावण की कांवर यात्रा और भक्ति
इस वर्ष 20 जुलाई को श्रावण की विशेषता बनी भव्य कांवर यात्रा। इसमें ग्रामवासियों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवा वस्त्र धारण कर शिवनाथ नदी से जल लाकर “बोल बम” के जयकारों के साथ भोलेनाथ का महाभिषेक किया। इस पावन अवसर पर पूरा वातावरण शिवमय हो उठा। स्थानीय निवासी चैतराम साहू ने बताया कि हर वर्ष श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और विशाल भंडारे का आयोजन होता है।
धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र
मेडेसरा का यह द्वादश ज्योतिर्लिंग स्थल अब न केवल धार्मिक आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है, बल्कि यह तेजी से ग्राम मेडेसरा को एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में भी स्थापित कर रहा है। यहाँ आने वाले हर आयु वर्ग के भक्त आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।






