वॉशिंगटन।
अमेरिका में चल रहे एक ऐतिहासिक मामले ने ट्रंप प्रशासन के टैरिफ फैसलों पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान यह बहस तेज हो गई कि अगर अदालत ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला दिया, तो उन व्यवसायों को क्या रिफंड मिलेगा जिन्होंने इन टैरिफ के तहत अरबों डॉलर का शुल्क चुकाया है?
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 सितंबर तक अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा नियंत्रण विभाग ने इन विवादित टैरिफ से 90 अरब डॉलर का राजस्व एकत्र किया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर कोर्ट इन्हें अवैध घोषित करती है, तो इस पूरी रकम का क्या होगा?
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश एमी कोनी बैरेट ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ चुनौती दे रहे व्यवसायों के वकील नील कटियाल से सवाल किया—
“अगर आप यह केस जीत जाते हैं, तो बताइए कि प्रतिपूर्ति प्रक्रिया कैसे चलेगी? क्या यह पूरी तरह गड़बड़ नहीं हो जाएगी?”
कटियाल ने स्वीकार किया कि रिफंड प्रक्रिया “मुश्किल और जटिल” होगी। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल—पांच कंपनियां—निश्चित रूप से रिफंड की हकदार हैं, लेकिन यह प्रक्रिया बेहद पेचीदा साबित हो सकती है। इस पर जज बैरेट ने टिप्पणी की—
“तो, यह तो गड़बड़ है।”
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला सुनाता है, तो अमेरिकी सरकार को अरबों डॉलर वापस लौटाने पड़ सकते हैं। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया, हजारों कंपनियों और पुराने रिकॉर्ड्स के चलते बेहद जटिल हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा होने पर अमेरिकी आर्थिक व्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।









