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शिवधाम कोड़िया में उमड़ा कांवड़ियों का विशाल जत्था, किया जलाभिषेक

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OM Darpan

Jul 22, 2025 06:13 am 542 views
शिवधाम कोड़िया में उमड़ा कांवड़ियों का विशाल जत्था, किया जलाभिषेक

  ननकटठी (लोकेश्वर सिंह ठाकुर)। सावन के दूसरे सोमवार को छत्तीसगढ़ के शिवधाम कोड़िया स्थित भुइं फोड़ शिव ज्योतिर्लिंग के दर्शन-पूजन व जलाभिषेक के लिए सुबह से ही शिव भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर मुख्य आकर्षण भक्ति के रंगों में रंगे कांवड़ियों का विशाल जत्था रहा, जो रिमझिम फुहारों के बीच बाजे-गाजे के साथ शिव मंदिर प्रांगण से निकला और त्रिवेणी संगम सगनी घाट से पवित्र जल भरकर अभिषेक करने शिवधाम पहुंचा। इस जत्थे में बड़ी संख्या में महिला कांवड़िये भी शामिल थीं।  
सगनी घाट पर उमड़ा आस्था का सैलाब घाट पर पवित्र जल भरने का दृश्य अत्यंत मनमोहक था। कांवड़ में जल लेकर जब यह जत्था कोड़िया के सगनी चौक पहुंचा, तो उनकी लंबी कतार देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। शिव मंदिर के मार्ग में केवल केसरिया वस्त्रधारी कांवड़िये ही नजर आ रहे थे, जिनकी खास पहचान उनकी पोशाक थी। "बोलबम, हर हर महादेव" के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो रहा था।
शिवमय हुआ मंदिर प्रांगण जैसे ही कांवड़िये मंदिर पहुंचे, मंदिर प्रांगण और शिवमंगल भवन प्रांगण पूरी तरह से भर गया। चारों ओर भक्ति और श्रद्धा का माहौल था। मंदिर के द्वार पर उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें देखने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। शिव महिमा के गीतों पर श्रद्धालु थिरकते नजर आए, जिससे आनंदमय वातावरण बन गया। काशीनाथ साहू व प्रदीप साहू ने किया जत्थे का नेतृत्व शिवधाम कोड़िया से कांवड़िये जत्थे का नेतृत्व काशीनाथ साहू व प्रदीप साहू कर रहे थे। इस यात्रा में आसपास के गांवों के कांवड़िये भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कई अन्य गांवों के कांवड़िया जत्थे भी सुबह बारिश के बीच अभिषेक करने पहुंचे, जिनमें खेरधा व जामुल के कांवड़ियों की संख्या अधिक थी।
दुर्ग से 21 किमी दूर स्थित है अनोखा शिव मंदिर गौरतलब है कि दुर्ग-धमधा मार्ग पर दुर्ग से 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव कोड़िया में एक अनोखा शिव मंदिर है, जहां भगवान शिव का दिव्य सहस्त्रेश्वर ज्योतिर्लिंग है, जिसे 'भुइं फोड़ शिव' के नाम से जाना जाता है। यह स्वयंभू है और इसमें प्राकृतिक रूप से 'ॐ' अंकित है। मान्यता है कि मालगुजारी जमाने में घुरूवा में कुआं खोदते समय नारियल के आकार का शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसने बाद में भव्य रूप ले लिया। विशाल मंदिर अब लोगों की श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बन गया है, और गांव अब शिवधाम कोड़िया के नाम से जाना जाता है। कांवड़ यात्रा: आस्था, साधना और तपस्या का प्रतीक - डॉ. नीलकंठ देवांगन इस अवसर पर डॉक्टर नीलकंठ देवांगन ने बताया कि कांवड़ (कांवर) भगवान शिव का ही एक रूप है। कांवड़ यात्रा शिव के कल्याणकारी रूप और निष्ठा के जल से उनके अभिषेक को दर्शाती है। कांवड़ शिव की आराधना, साधना और तपस्या का ही एक रूप है। शिवजी के प्रति कांवड़ियों की गहरी आस्था और श्रद्धा होती है, और वे इसी आस्था और श्रद्धा को जीते हैं। इस यात्रा के दौरान जो भी शिव की आराधना करता है, वह धन्य हो जाता है। हर हर महादेव के जयघोष के साथ हुआ जलाभिषेक व आरती हर हर महादेव के जयघोष के साथ भक्तों ने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया, जिसके पश्चात मंदिर के पुजारी कृष्णा रमेश बन गोस्वामी द्वारा शिवजी की आरती की गई। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कांवड़ यात्रा का समापन हुआ। इस कांवड़ यात्रा में ग्राम कोड़िया की सरपंच श्रीमती जानकी साहू, सभापति व जनपद सदस्य भूपेंद्र साहू, ग्राम बागडूमर की सरपंच सुश्री दामिनी साहू, खेरथा के लक्ष्मी नारायण साहू सहित पंच, माताओं, बहनों, युवाओं व बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
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