हिंदू महासभा ने पकड़ा रायपुर निगम का संदिग्ध वाहन, न नंबर प्लेट, न आदेश; अधिकारियों ने जांचकर्ता को धमकाया
OM Darpan
Sep 09, 2025 12:34 am
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09 Sep 2025
रायपुर।
राजधानी रायपुर के शिवानंद नगर में रायपुर नगर निगम जोन क्रमांक 1 की एक गाड़ी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ युवा हिंदू महासभा के रायपुर जिला महामंत्री लवकुश गुप्ता ने एक निगम वाहन को रोका, जो बिना किसी आधिकारिक दस्तावेज और नंबर प्लेट के चल रहा था। इस घटना ने निगम के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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लवकुश गुप्ता ने बताया कि जब उन्होंने निगम की गाड़ी को शिवानंद नगर में रोका और वाहन चालक से वाहन चलाने के संबंध में आदेश की कॉपी मांगी, तो चालक ने बताया कि उसके पास कोई आदेश नहीं है। इतना ही नहीं, गाड़ी पर नंबर प्लेट भी नहीं थी, जो सड़क पर चलने वाले किसी भी वाहन के लिए अनिवार्य है। चालक यह भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पाया कि गाड़ी को कहां ले जाया जा रहा है, जिससे इसकी मंशा पर संदेह गहरा गया।
इस गंभीर मामले को लेकर जब लवकुश गुप्ता ने निगम के उच्च अधिकारियों से संपर्क किया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। अधिकारियों ने सीधे तौर पर कहा कि वे आदेश की कॉपी नहीं दिखा सकते और इसे सरकारी कार्य में बाधा बताया। उन्होंने लवकुश गुप्ता को सलाह दी कि वे निगम कार्यालय में जाकर बात करें या चाहें तो थाने में एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं। अधिकारियों के इस रवैये ने मामले को और अधिक उलझा दिया है और जनता के बीच कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ दिए हैं। यह घटना सरकारी विभागों में अनियमितताओं और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है।
न नंबर प्लेट ना आदेश कॉपी
लवकुश गुप्ता ने बताया कि जब उन्होंने निगम की गाड़ी को शिवानंद नगर में रोका और वाहन चालक से वाहन चलाने के संबंध में आदेश की कॉपी मांगी, तो चालक ने बताया कि उसके पास कोई आदेश नहीं है। इतना ही नहीं, गाड़ी पर नंबर प्लेट भी नहीं थी, जो सड़क पर चलने वाले किसी भी वाहन के लिए अनिवार्य है। चालक यह भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पाया कि गाड़ी को कहां ले जाया जा रहा है, जिससे इसकी मंशा पर संदेह गहरा गया।
अधिकारियों का टालमटोल भरा जवाब
इस गंभीर मामले को लेकर जब लवकुश गुप्ता ने निगम के उच्च अधिकारियों से संपर्क किया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। अधिकारियों ने सीधे तौर पर कहा कि वे आदेश की कॉपी नहीं दिखा सकते और इसे सरकारी कार्य में बाधा बताया। उन्होंने लवकुश गुप्ता को सलाह दी कि वे निगम कार्यालय में जाकर बात करें या चाहें तो थाने में एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं। अधिकारियों के इस रवैये ने मामले को और अधिक उलझा दिया है और जनता के बीच कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ दिए हैं। यह घटना सरकारी विभागों में अनियमितताओं और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है।
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