तेहरान/नई दिल्ली।
ईरान में आर्थिक बदहाली और महंगाई के खिलाफ जनाक्रोश हिंसक रूप ले चुका है। सरकार ने प्रदर्शन रोकने के लिए इंटरनेट और संचार सेवाएं ठप कर दी हैं, जिससे देश बाहरी दुनिया से कट गया है। इसके बावजूद निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के आह्वान पर तेहरान समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए।
हालात बिगड़ते देख ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। खामेनेई ने आरोप लगाया कि उपद्रवी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के इशारे पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि तेहरान विदेशियों के लिए काम करने वाले ‘भाड़े के सैनिकों’ को बर्दाश्त नहीं करेगा।
इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे फिलहाल पहलवी से नहीं मिलेंगे, लेकिन चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोली चली तो अमेरिका मदद को आगे आएगा। एपी और मानवाधिकार एजेंसी के मुताबिक, 28 दिसंबर से जारी प्रदर्शनों में अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2270 लोग हिरासत में हैं। दुबई से ईरान की 20 उड़ानें भी रद्द कर दी गई हैं।









