- महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा- पण्डोनगर में डॉ. प्रसाद का आगमन इतिहास का स्वर्णिम अध्याय
- जनजातीय समाज में आया था बड़ा बदलाव
सूरजपुर (पण्डोनगर).
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की 141वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को जिले के पण्डोनगर स्थित ऐतिहासिक ‘राष्ट्रपति भवन’ में गरिमामय श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने डॉ. प्रसाद के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में क्षेत्र के इतिहास को याद करते हुए वक्ताओं ने बताया कि कैसे देश के प्रथम नागरिक का आगमन इस सुदूर वनांचल क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक घटना थी, जिसकी यादें आज भी यहां की फिजाओं में जीवित हैं।
सादगी और राष्ट्रनिष्ठा की मिसाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय इतिहास के ऐसे महानायक हैं, जिन्होंने अपने सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा से स्वतंत्र भारत की आधारशिला को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि पण्डोनगर में डॉ. प्रसाद का आगमन इस क्षेत्र के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय रहा है। यह स्थान आज भी उनकी अमूल्य विरासत और उनके विचारों को संजोए हुए है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
पण्डो समुदाय में आया सकारात्मक बदलाव
मंत्री राजवाड़े ने क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने पर डॉ. प्रसाद के प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रथम राष्ट्रपति के आगमन के बाद विशेष पिछड़ी जनजाति पण्डो समुदाय सहित अन्य जनजातीय समाजों में व्यापक सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। उस दौरे का प्रभाव आज भी क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में स्पष्ट देखा जा सकता है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की प्रगति और उनकी संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
मृदंग की थाप पर सांस्कृतिक कार्यक्रम
जयंती समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। इस दौरान मृदंग वाद्य-संगीत और स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की। प्रशासन की ओर से संबंधित विभागों के अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद रहे।










