नेपाल की स्थानीय भाषाओं के लिए भारत देगा एआई तकनीक, भाषिणी और काठमांडू यूनिवर्सिटी में करार
OM Darpan
Sep 02, 2026 11:15 pm
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02 Sep 2026
काठमांडू/नई दिल्ली। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी) और काठमांडू यूनिवर्सिटी के बीच नेपाल में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (डीपीआई-एआई) को लेकर अहम बैठक हुई। इस दौरान दोनों संस्थानों ने भाषा एआई में संयुक्त सहयोग के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य नेपाल की स्थानीय भाषाओं के लिए एआई तकनीक को मजबूत करना है। बैठक में मौजूदा भाषा मॉडलों को बेहतर बनाने और कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं के लिए नए मॉडल तैयार करने पर सहमति बनी। इसमें नेपाली, नेवारी, तमांग और गुरुंग जैसी भाषाओं के साथ-साथ प्राचलित और रंजना जैसी पारंपरिक लिपियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
चर्चा का एक अहम हिस्सा भाषा डेटा की चुनौती पर केंद्रित रहा। उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट बनाने के लिए विभिन्न भाषाओं, वक्ताओं और लिपियों में निरंतर डेटा संग्रह और संरक्षण को आवश्यक बताया गया। इसके अलावा अनुवाद क्षमताओं को बेहतर बनाने और भाषा मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग आवश्यकताओं को जुटाने पर भी बात हुई।
नेवारी और तमांग पर फोकस
परियोजना के तहत केवल मॉडल विकास ही नहीं, बल्कि उनके वास्तविक उपयोग पर भी काम होगा। इसमें वॉइस-फर्स्ट समाधानों के जरिए स्थानीय भाषाओं में बेहतर डिजिटल अनुभव प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। काठमांडू यूनिवर्सिटी अपने डीपीआई-एआई केंद्र के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी।9 अरब एआई अनुमान का अनुभव
डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग वर्तमान में 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को संचालित कर रहा है। यह 36 भारतीय पाठ भाषाओं और 23 ध्वनि भाषाओं में सेवाएं दे रहा है। भाषिणी अब तक 9 अरब से अधिक संचयी एआई अनुमानों को सक्षम बना चुका है। अब यही विशेषज्ञता नेपाल के भाषाई विविधता को डिजिटल परितंत्र में शामिल करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।जरूरी खबरें
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