सरकारी दफ्तरों के कबाड़ से 491 करोड़ की कमाई, स्वच्छता अभियान में तीन गुना अधिक स्थलों की सफाई
OM Darpan
डॉ. जितेंद्र सिंह ने की प्रगति की समीक्षा, शिक्षा विभाग और रेलवे का रहा सबसे बड़ा योगदान
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार के कार्यालयों में चल रहे 'विशेष स्वच्छता अभियान 6.0' के तहत कबाड़ (स्क्रैप) निपटान से अब तक 491.28 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। सोमवार को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस अभियान की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल अभियान के प्रदर्शन में हुए बड़े सुधार को रेखांकित किया।
समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 19 अक्टूबर तक देश भर में 8,34,509 स्थलों पर स्वच्छता अभियान चलाया गया। पिछले साल इसी अवधि (विशेष अभियान 5.0) में यह संख्या 2,75,432 थी, जो इस बार 3.03 गुना अधिक है। वहीं, स्क्रैप निपटान से होने वाली कमाई भी 304.72 करोड़ रुपये से बढ़कर 491.28 करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 1.61 गुना अधिक है। इसके अलावा दफ्तरों में 116 लाख वर्ग फुट जगह उत्पादक कार्यों के लिए खाली कराई गई है।
रेलवे ने कमाए 425 करोड़, शिक्षा विभाग ने साफ किए 4 लाख स्थल
अभियान में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और रेल मंत्रालय का प्रमुख योगदान रहा। शिक्षा विभाग ने जहां 4,15,353 स्थलों पर सफाई की रिपोर्ट दी, वहीं अकेले रेलवे ने कबाड़ के निपटान से सबसे अधिक 425.06 करोड़ रुपये जुटाए। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने भी अपने कार्यालय परिसर में 1,200 वर्ग फुट जगह खाली कर उपलब्ध स्थान के अधिकतम उपयोग का उदाहरण पेश किया है।
ई-कचरा और प्लास्टिक प्रबंधन पर जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि फाइलों के निपटान से शुरू हुआ यह अभियान अब ई-कचरा प्रबंधन और अप्रचलित सामग्रियों के निपटान तक विस्तारित हो गया है। उन्होंने सभी सचिवों से अपील की कि वे देश भर के क्षेत्रीय कार्यालयों में भी एक दिवसीय विशेष अभियान चलाएं। केंद्रीय मंत्री ने इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल और प्लास्टिक के वैज्ञानिक प्रबंधन व रिसाइकलिंग की नई तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया, ताकि आम जनता को इसके लिए प्रेरित किया जा सके।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और नई सोच
बैठक में डीओपीटी ने बताया कि स्वच्छता के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इलेक्ट्रिक वाहन अपनाए हैं। वहीं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव ने दफ्तरों में जगह के लिए 'उपलब्धता के बजाय उपयोगिता' के आकलन पर जोर दिया। डॉ. सिंह ने अन्य विभागों को भी वास्तविक जरूरतों के हिसाब से इस दृष्टिकोण को अपनाने और एक-दूसरे के सफल अनुभवों को साझा करने की सलाह दी है।
बता दें कि लंबित मामलों और जन शिकायतों के निपटारे के उद्देश्य से यह अभियान 2 अक्टूबर से शुरू हुआ है और 31 अक्टूबर तक चलेगा। इस उच्च स्तरीय बैठक में डीएआरपीजी सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा, डीओपीटी सचिव रचना शाह, डीएसटी सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे, एमओईएस सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला, डीएसआईआर सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी और डीबीटी सचिव डॉ. राजेश सुधीर गोखले सहित कई अन्य विभागों के सचिव मौजूद रहे।
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