भारत पहली बार करेगा अंतर्राष्ट्रीय विधि मापन समिति की 61वीं बैठक की मेजबानी
OM Darpan
नई दिल्ली। भारत पहली बार अंतर्राष्ट्रीय विधि मापन समिति (सीआईएमएल) की 61वीं बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। यह तीन-दिवसीय वैश्विक सम्मेलन 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विधिक मापन संगठन (ओआईएमएल) के सहयोग से आयोजित इस बैठक में दुनिया भर के 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि और कानूनी मापन विशेषज्ञ शामिल होंगे।
वैश्विक मंच पर भारत की उपलब्धि
इस महत्वपूर्ण आयोजन की मेजबानी को अंतरराष्ट्रीय सहयोग, मापन मानकों के सामंजस्य, निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने और उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील सहित ओआईएमएल के सदस्य देशों, संबद्ध सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
संगोष्ठी और रणनीति कार्यशाला का आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत में 26 अक्टूबर 2026 को "कानूनी मापन में विकास" विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी। इसमें नियामक सेवाओं के डिजिटलीकरण, मापन उपकरणों के अंतरराष्ट्रीय सामंजस्य व मान्यता, ई-लर्निंग टूल और प्रशासनिक दृष्टिकोणों पर अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इसके बाद 27 अक्टूबर 2026 को ओआईएमएल रणनीति कार्यशाला होगी, जिसमें संगठन की भावी रणनीतिक दिशा, उभरती चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और डिजिटल परिवर्तन पर चर्चा की जाएगी।
प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श
तीन-दिवसीय कार्यक्रम के दौरान सीआईएमएल के सदस्य अंतरराष्ट्रीय सिफारिशों के संशोधन, ओआईएमएल की तकनीकी गतिविधियों, प्रमाणन प्रणाली (ओआईएमएल-सीएस), क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर निर्णय लेंगे। इससे पहले संगठन की 60वीं सीआईएमएल बैठक 13 और 15 अक्टूबर 2025 को पेरिस (फ्रांस) में आयोजित की गई थी, जिसमें 55 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्वचालित अपवर्तनांकमापी, भार और यातायात गतिमापी से संबंधित तकनीकी प्रकाशनों को स्वीकृति दी गई थी।
उद्योग और उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ
इस सम्मेलन से भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय मापन मानकों और ओआईएमएल प्रमाणन प्रणाली की बेहतर समझ मिलेगी, जिससे गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के विकास और वैश्विक बाजारों तक पहुंच में आसानी होगी। इससे व्यापार में आने वाली तकनीकी रुकावटों और परीक्षण के दोहराव से राहत मिलेगी। वहीं उपभोक्ताओं के लिए सटीक माप से लेन-देन में पारदर्शिता, सही मात्रा की घोषणा और विश्वास सुनिश्चित होगा। यह आयोजन भारत को अपने नियामक सुधारों व डिजिटलीकरण के अनुभव साझा करने और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का अवसर देगा।
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