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सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट की टिप्पणी पर लगाई रोक

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OM Darpan

Dec 12, 2025 11:18 pm 320 views
सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट की टिप्पणी पर लगाई रोक
  • हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की कार्रवाई को बताया था 'लैंड-ग्रैबिंग स्ट्रेटजी'

  • शीर्ष अदालत ने कहा- ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में दखल न दें, अगली सुनवाई 27 जनवरी को

नई दिल्ली.

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के चर्चित मुनंबम जमीन विवाद मामले में शुक्रवार को अहम सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की कार्रवाई को 'लैंड-ग्रैबिंग स्ट्रेटजी' (जमीन कब्जाने की रणनीति) करार दिया था। शीर्ष अदालत ने मामले में पक्षकारों को विवादित जमीन पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को जमीन के स्वामित्व की जांच के लिए आयोग (Commission) नियुक्त करने की अनुमति देने वाले आदेश पर कोई रोक नहीं है।

मामले की सुनवाई जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने की। कोर्ट ने केरल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को तय की गई है।

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हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसला दिया: सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में अपने अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) का उल्लंघन किया है। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट को जमीन के स्वरूप या वक्फ डीड की वैधता पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं था, क्योंकि यह मामला पहले से ही वक्फ ट्रिब्यूनल के पास विचाराधीन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की गहराई से जांच और तथ्यों को परखने का अधिकार ट्रिब्यूनल का है, न कि हाईकोर्ट का।

याचिकाकर्ता और सरकार की दलीलें

याचिकाकर्ता 'केरल वक्फ संरक्षक वेदी' की ओर से अदालत में दलील दी गई कि हाईकोर्ट ने वक्फ डीड की वैधता पर टिप्पणी करके गलती की है। यह मुद्दा सीधे तौर पर वक्फ ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए हाईकोर्ट का अवलोकन (Observation) कानूनन सही नहीं था।

वहीं, केरल सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि विवादित भूमि की जांच के लिए आयोग की नियुक्ति उचित कदम था और आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुका है। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का इस मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध (Locus Standi) नहीं है, इसलिए उनकी चुनौती को खारिज किया जाना चाहिए।

क्या है मुनंबम जमीन विवाद?

यह पूरा मामला एर्नाकुलम जिले के चेरई और मुनंबम गांवों की करीब 404 एकड़ जमीन से जुड़ा है। यहां रहने वाले स्थानीय निवासियों, जिनमें बड़ी संख्या में मछुआरे शामिल हैं, का आरोप है कि वक्फ बोर्ड उनकी निजी जमीन को अवैध रूप से वक्फ संपत्ति घोषित कर रहा है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि उनके पास जमीन के पक्के दस्तावेज, रजिस्टर्ड डीड, लैंड टैक्स रसीदें और पुराने अदालती फैसले मौजूद हैं, जो उनके मालिकाना हक को साबित करते हैं। विवाद तब गहराया जब 2019 में कथित तौर पर बिना किसी सुनवाई के जमीन का नोटिफिकेशन जारी कर उसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया, जिसके खिलाफ स्थानीय लोग हाईकोर्ट पहुंचे थे।

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