देश का पहला सबसे बड़ा सर्वेक्षण जहाज आईएनएस संध्यायक ने मलेशिया में दिखाई ताकत, हाइड्रोग्राफिक सहयोग पर दिया ज़ोर
OM Darpan
Jul 20, 2025 12:04 pm
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20 Jul 2025
पोर्ट क्लैंग (मलेशिया):
भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से डिज़ाइन व निर्मित सबसे बड़ा सर्वेक्षण पोत (एसवीएल) आईएनएस संध्यायक 16 से 19 जुलाई 2025 तक मलेशिया के पोर्ट क्लैंग में अपना पहला दौरा किया। यह दौरा हाइड्रोग्राफिक सहयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया, जो भारतीय नौसेना हाइड्रोग्राफिक विभाग (आईएनएचडी) व राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक कार्यालय के अंतर्गत क्षेत्रीय हाइड्रोग्राफिक क्षमता निर्माण में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
समुद्री सर्वेक्षण में आत्मनिर्भरता का प्रतीक
संध्यायक श्रेणी का यह पहला हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत, आईएनएस संध्यायक, फरवरी 2024 में भारतीय नौसेना में शामिल हुआ था। यह पोत तटीय व गहरे पानी में सर्वेक्षण करने में पूरी तरह सक्षम है और इसमें समुद्र विज्ञान संबंधी डेटा एकत्र करने की आधुनिक प्रणाली मौजूद है। इसके अतिरिक्त, यह पोत हेलीकॉप्टर संचालन व अस्पताल की सुविधाओं से भी लैस है, जो इसे खोज और बचाव (एसएआर) जैसे मानवीय कार्यों के लिए भी उपयुक्त बनाता है।
समुद्री सर्वेक्षण में आत्मनिर्भरता का प्रतीक
संध्यायक श्रेणी का यह पहला हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत, आईएनएस संध्यायक, फरवरी 2024 में भारतीय नौसेना में शामिल हुआ था। यह पोत तटीय व गहरे पानी में सर्वेक्षण करने में पूरी तरह सक्षम है और इसमें समुद्र विज्ञान संबंधी डेटा एकत्र करने की आधुनिक प्रणाली मौजूद है। इसके अतिरिक्त, यह पोत हेलीकॉप्टर संचालन व अस्पताल की सुविधाओं से भी लैस है, जो इसे खोज और बचाव (एसएआर) जैसे मानवीय कार्यों के लिए भी उपयुक्त बनाता है।
मलेशिया के साथ तकनीकी आदान-प्रदान क्लैंग बंदरगाह पर आईएनएस संध्यायक की इस पहली यात्रा का मुख्य उद्देश्य तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। इसके तहत, दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सर्वेक्षण प्रौद्योगिकियों को साझा किया जाएगा व सतत जल सर्वेक्षण सहायता जैसे क्षेत्रों में समन्वित सहयोग के माध्यम से आपसी संबंधों को और मजबूत किया जाएगा।ज्ञान साझा करना व सद्भावना बढ़ाना मुख्य उद्देश्य इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें गहन ज्ञान आदान-प्रदान सत्र प्रमुख रहे। इसके अतिरिक्त, आधिकारिक स्वागत समारोह भी आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना को बढ़ावा देना था। 'सागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा व विकास) दृष्टिकोण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इस सफल यात्रा ने क्षेत्रीय समुद्री सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को एक बार फिर से पुष्ट किया है। मलेशिया में दिखा भारत का दम आईएनएस संध्यायक की यह यात्रा न केवल भारत और मलेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि यह क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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