16 सितम्बर 2026 |
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बस्तर के जंगलों में सफल हुआ 'मिशन रीयूनाइट': वन विभाग ने तेंदुए के दो शावकों को उनकी मां से सुरक्षित मिलाया

OM Darpan

Aug 26, 2026 02:47 am 743 views
बस्तर के जंगलों में सफल हुआ 'मिशन रीयूनाइट': वन विभाग ने तेंदुए के दो शावकों को उनकी मां से सुरक्षित मिलाया
 
  • चित्रकोट रेंज में ग्रामीणों के सहयोग से 48 घंटे तक चला 'मिशन रीयूनाइट', ट्रैप कैमरे में कैद हुआ मां-बच्चों का मिलन

✍️ विशेष संवाददाता बस्तर | बस्तर के घने जंगलों में वन विभाग और ग्रामीणों की संवेदनशीलता से तेंदुए के दो बिछड़े शावकों को सुरक्षित उनकी मां से मिलाने का सफल अभियान पूरा हुआ। करीब 48 घंटे तक चले इस 'मिशन रीयूनाइट' के तहत वन अमले ने लगातार निगरानी रखी और शावकों को उनकी मां तक पहुंचाने के लिए पूरी सावधानी बरती। यह अभियान वन मंत्री केदार कश्यप के वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के संकल्प को धरातल पर साकार करने का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

चित्रकोट रेंज में सूचना के बाद सक्रिय हुआ वन अमला

इस रेस्क्यू अभियान की शुरुआत 22 अगस्त को हुई, जब चित्रकोट रेंज के पहाड़ी वन क्षेत्र में ग्रामीण बच्चों द्वारा तेंदुए का एक छोटा शावक उठाए जाने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। वन मंडलाधिकारी दीपेश कपिल के मार्गदर्शन में वन अमले ने रात करीब 11.20 बजे शावक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। विभाग ने शावक को उसकी मां से मिलाने के लिए उसे तड़के करीब 4 बजे घने जंगल में एक चिन्हित सुरक्षित स्थान पर रखा। हालांकि, अगले दिन तक मादा तेंदुआ शावक के पास नहीं पहुंची थी।

48 घंटे की निगरानी और हाई-रिजोल्यूशन कैमरों का प्रयोग

पहले प्रयास के बाद वन विभाग ने ग्रामीणों के सहयोग से आसपास के क्षेत्र में दूसरे शावक की भी तलाश शुरू की और जल्द ही उसे भी सुरक्षित ढूंढ लिया गया। दोनों शावकों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आसपास हाई-रिजोल्यूशन ट्रैप कैमरे लगाए गए। वन अमले ने करीब 48 घंटे तक लगातार कड़ी निगरानी रखी। सोमवार रात ट्रैप कैमरे में वह भावुक दृश्य कैद हुआ जब मादा तेंदुआ अपने दोनों शावकों के पास पहुंची और उन्हें सुरक्षित अपने साथ घने जंगल की ओर ले गई। शावकों के अपनी मां से मिलने के बाद टीम ने राहत की सांस ली।

वन्यजीव संरक्षण और सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल

यह अभियान केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की बड़ी मिसाल है। वन विभाग ने शावकों को अपने पास रखने के बजाय उनकी मां से मिलाने को प्राथमिकता दी। ग्रामीणों की सजगता, वन अमले की तत्परता और आधुनिक तकनीक के समन्वय से इन नन्हे शावकों को उनका प्राकृतिक परिवार वापस मिल सका। यह सफलता स्पष्ट करती है कि वन्यजीव संरक्षण वन विभाग और स्थानीय समुदाय के साझा प्रयासों से ही अधिक प्रभावी हो सकता है।  

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