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बिहार 2025: एनडीए को मिला ऐतिहासिक जनादेश, महागठबंधन का हुआ सूपड़ा साफ

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OM Darpan

Nov 15, 2025 04:41 am 322 views
बिहार 2025: एनडीए को मिला ऐतिहासिक जनादेश, महागठबंधन का हुआ सूपड़ा साफ
  • बिहार के लोगों ने  उड़ा दिया गर्दा : मोदी

  • प्रधानमंत्री ने 'महिला-यूथ' को बताया नया 'MY' फॉर्मूला

नई दिल्ली/पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की ऐतिहासिक जीत को पार्टी और जनता द्वारा एनडीए सरकार के प्रति समर्थन का परिणाम बताया है। शुक्रवार को नई दिल्ली में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने बिहार की जनता के ऐतिहासिक जनादेश की सराहना की और कहा, "बिहार के लोगों ने गर्दा उड़ा दिया।" महागठबंधन पर तंज कसते हुए, उन्होंने राज्य को आश्वासन दिया कि 'कट्टा सरकार' कभी वापस नहीं आएगी और राज्य भविष्य में अभूतपूर्व विकास देखेगा। मोदी ने कहा, "हम NDA के लोग, हम तो जनता जनार्दन के सेवक हैं। हम अपनी मेहनत से जनता का दिल खुश करते रहते हैं, और हम तो जनता जनार्दन का दिल चुरा कर बैठे हुए हैं, इसलिए आज बिहार ने बता दिया है — फिर एक बार NDA सरकार।"

'विकसित बिहार' और नया 'MY' फॉर्मूला

प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार के लोगों ने 'विकसित बिहार' और 'समृद्ध बिहार' के लिए मतदान किया है। उन्होंने कहा, "मैंने चुनाव प्रचार के दौरान, बिहार की जनता से रिकॉर्ड वोटिंग का आग्रह किया था और बिहार के लोगों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। मैंने बिहार के लोगों से एनडीए को प्रचंड विजय दिलाने का आग्रह किया था, बिहार की जनता ने मेरा ये आग्रह भी माना।" मोदी ने कहा कि बिहार ने 2010 के बाद का सबसे बड़ा जनादेश एनडीए को दिया है। जंगलराज के अपने बयानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "जब मैं जंगलराज की बात करता था, कट्टा सरकार की बात करता था तो RJD के लोग विरोध नहीं करते थे लेकिन कांग्रेस को बहुत चुभता था। आज मैं फिर कहता हूं कि 'अब वापस नहीं आएगी कट्टा सरकार'।" उन्होंने बिहार में तुष्टिकरण वाले पुराने 'MY' फॉर्मूले का जिक्र करते हुए कहा कि इस जीत ने एक नया सकारात्मक 'MY Formula' दिया है, जो है— महिला और यूथ (युवा)। उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं ने जंगलराज वाले पुराने और सांप्रदायिक MY Formula को ध्वस्त कर दिया है।

चिराग पासवान बने 'गेम चेंजर'

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में एनडीए की स्पष्ट वापसी दिखी, जबकि महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वीआईपी) बिखर गया और जन स्वराज का सूपड़ा साफ हो गया। इन चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी के 'हनुमान' कहे जाने वाले चिराग पासवान 'स्टार' बनकर उभरे। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (आर) ने 27 में से 19 सीटों पर बढ़त बनाकर सभी को चौंका दिया। उनका स्ट्राइक रेट इस चुनाव में चर्चा का विषय रहा। पासवान को उनका कोर वोट बैंक (पासवान) और अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का भी सीधा फायदा मिला। उनका 'बिहारी फर्स्ट' का नारा सटीक बैठा। यह पूछे जाने पर कि क्या वह नई सरकार में उप-मुख्यमंत्री पद के लिए दावा करेंगे, चिराग पासवान ने कहा, "नहीं, बिल्कुल नहीं। मुझे लगता है कि योग्य उम्मीदवार मेरी पार्टी से ही होगा।"

नीतीश की निर्णायक जीत 

यह जीत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे निर्णायक चुनावी जीतों में से एक बताई जा रही है। जेडी(यू)-बीजेपी की नई साझेदारी को प्रधानमंत्री मोदी की देशव्यापी लोकप्रियता का भी लाभ मिला। 2020 के बिहार चुनाव में, लोजपा ने 130 से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ़ एक सीट जीत पाई थी। इस बार के प्रदर्शन ने चिराग को एक युवा बिहारी नेता के रूप में स्थापित किया है।

 'जंगलराज' से 2025 तक

वर्ष 2000 के आसपास लालू-राबड़ी सरकार पर 940 करोड़ के चारा घोटाले और राज्य में बढ़ते अपराध दर के कारण 'जंगल राज' का तमगा लगा था। 2000 के चुनावों में किसी को बहुमत नहीं मिला, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल ने एनडीए को सरकार बनाने का न्योता दिया। 3 मार्च 2000 को नीतीश कुमार ने पहली बार शपथ ली, लेकिन बहुमत न जुटा पाने के कारण 7 दिनों में ही इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद फरवरी 2005 के चुनावों में भी त्रिशंकु विधानसभा बनी, जब रामविलास पासवान किंगमेकर की भूमिका में थे। गतिरोध के चलते राज्य में सात महीने बाद अक्टूबर-नवंबर 2005 में फिर चुनाव हुए, जिसके बाद नीतीश कुमार एनडीए की जीत के साथ मुख्यमंत्री बने और पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में हैं।
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