एक फोन कॉल ने बदल दी तस्वीर सुकमा के घने जंगलों में सात दिन में दूर हुआ अंधेरा
OM Darpan
सुकमा
छिंदगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले कोकावाड़ा-जांगड़पाल गांव के लोगों के लिए रात का अंधेरा अब खौफ का कारण नहीं है। बरसों से रात के समय जहरीले जीवों और हादसों के साये में जीने वाले लगभग 450 ग्रामीणों की जिंदगी एक फोन कॉल ने बदल दी है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर की गई एक शिकायत के महज सात दिनों के भीतर प्रशासन ने पुसपाल-चितलनार मार्ग को स्ट्रीट लाइट की दूधिया रोशनी से जगमगा दिया है।
सांप-बिच्छुओं के खौफ में कटती थीं रातें
बरसात के दिनों में और घने जंगलों से घिरे इस कच्चे रास्ते पर सफर करना ग्रामीणों के लिए रोज की चुनौती थी। सूरज ढलते ही पुसपाल-चितलनार मार्ग पर गहरा सन्नाटा पसर जाता था। ग्रामीण गाड़ियों की हल्की रोशनी या टॉर्च के सहारे सांप-बिच्छुओं के डर के बीच रास्ता पार करते थे। अंधेरे के कारण बच्चों, बुजुर्गों और अचानक बीमार पड़ने वाले मरीजों को अस्पताल ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत और त्वरित एक्शन
गांव के ही एक युवा रितेश यादव ने इस पुरानी समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का सहारा लिया। उन्होंने बिना किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटे, सीधे फोन कर प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई। शिकायत दर्ज होते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। कलेक्टर अमित कुमार की सीधी निगरानी में तय समय-सीमा के भीतर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम शुरू कर दिया गया।
सप्ताह भर में रोशन हुआ पूरा मार्ग
ग्रामीणों को उम्मीद नहीं थी कि जिस परेशानी से वे बरसों से जूझ रहे थे, उसका समाधान इतनी जल्दी निकल जाएगा। मात्र एक सप्ताह के भीतर सड़क पर खंभे लगाकर स्ट्रीट लाइटें चालू कर दी गईं। अब यह मार्ग रात में भी पूरी तरह सुरक्षित है। अपने गांव को रोशन देखकर रितेश यादव समेत सभी ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार जताया है। ग्रामीणों का मानना है कि नक्सल-प्रभावित अंतिम छोर के गांवों में ऐसी त्वरित कार्रवाई विकास की नई उम्मीद जगा रही है।
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