18 सितम्बर 2026 |
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अंबेडकर अस्पताल में बिहार की महिला की सफल बाईपास सर्जरी, तीनों धमनियों में था गंभीर ब्लॉकेज

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OM Darpan

Sep 01, 2026 08:55 pm 348 views
अंबेडकर अस्पताल में बिहार की महिला की सफल बाईपास सर्जरी, तीनों धमनियों में था गंभीर ब्लॉकेज
  रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में बिहार की 48 वर्षीय महिला की सफल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) की गई। मरीज के हृदय की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ट्रिपल वेसल डिजीज कहा जाता है। विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने मरीज की बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की। इस सर्जरी में बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी का उपयोग किया गया। आर्टेरियल ग्राफ्ट को लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला ग्राफ्ट माना जाता है। ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही मरीज ने चलना-फिरना शुरू कर दिया है। मरीज की सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी तकनीक से की गई। इसमें सीने की मध्य हड्डी यानी स्टर्नम को सावधानीपूर्वक खोलकर हृदय तक पहुंच बनाई जाती है। कोरोनरी बाईपास सर्जरी में यह एक स्थापित और विश्वसनीय ऑपरेटिव तकनीक है, जिसे चिकित्सा क्षेत्र में गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है।

500 के पार था शुगर लेवल

मरीज के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती उनका अत्यधिक अनियंत्रित ब्लड शुगर था। अस्पताल में भर्ती के समय शुगर लेवल 500 mg/dL से भी अधिक था। ऐसी स्थिति में तत्काल सर्जरी जोखिमपूर्ण थी। चिकित्सकीय टीम ने पहले शुगर को नियंत्रित किया और स्थिति अनुकूल होने के बाद ही बाईपास सर्जरी की गई।

मधुबनी में बताया था गैस का दर्द

मरीज को करीब डेढ़ महीने पहले सीने में दर्द हुआ था। मधुबनी के अस्पताल में विशेषज्ञ सुविधा न होने के कारण उन्हें गैस की दवा देकर घर भेज दिया गया। दोबारा दर्द होने पर दरभंगा में एंजियोग्राफी कराई गई, जहां तीनों नसों में ब्लॉकेज मिला। रायपुर में रहने वाले रिश्तेदार की सलाह पर परिजन मरीज को लेकर अंबेडकर अस्पताल पहुंचे।

बिहार के कार्ड पर छत्तीसगढ़ में इलाज

मरीज बिहार की निवासी थीं, इसलिए छत्तीसगढ़ में इलाज को लेकर संशय था। आयुष्मान योजना कार्यालय से पुष्टि के बाद बिहार के आयुष्मान कार्ड के आधार पर ही अंबेडकर अस्पताल में निशुल्क सर्जरी की गई। डॉ. साहू के अनुसार, अब कम उम्र की महिलाओं में भी अनियंत्रित मधुमेह और मोटापे के कारण हृदय रोग का खतरा बढ़ रहा है।

पड़ोसी राज्यों का बढ़ा भरोसा

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि बिहार सहित आसपास के राज्यों से मरीजों का आना संस्थान के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। अब सरकारी अस्पताल में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जटिल हृदय रोगों की सफल सर्जरी की जा रही है।

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