राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' से जुड़कर अंजना भगत ने हासिल किया मुकाम, ड्रिप विधि से कर रहीं सब्जियों की खेती
OM Darpan
Aug 31, 2026 11:21 pm
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31 Aug 2026
✍️ विशेष संवाददाता
कोरबा | कोरबा जिले के ग्राम बेला की अंजना भगत ने अपनी मेहनत और नवाचार से ग्रामीण महिलाओं के लिए सफलता की एक नई इबारत लिखी है। कभी घरेलू जरूरतों तक सीमित रहने वाली उनकी बाड़ी अब परिवार की आर्थिक समृद्धि का प्रमुख आधार बन गई है। अंजना भगत ने सब्जी उत्पादन को अपनी आजीविका का जरिया बनाया और आज उनकी मेहनत का परिणाम है कि वे 'लखपति दीदी' के रूप में पहचानी जा रही हैं।
'बिहान' और ड्रिप तकनीक ने बदली राह
अंजना भगत वर्ष 2017 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन यानी 'बिहान' से जुड़ी हुई हैं। वे 'सहेली स्वसहायता समूह' की सक्रिय सदस्य हैं, जिसमें कुल 13 महिलाएं शामिल हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता दी और सब्जी उत्पादन में ड्रिप विधि को अपनाया। अपनी बाड़ी में उन्होंने बरबट्टी, लौकी और डोड़का जैसी सब्जियों की खेती शुरू की। ड्रिप विधि के कारण फसलों की देखभाल अधिक व्यवस्थित तरीके से होने लगी, जिससे पैदावार में सुधार हुआ।1.50 लाख की सालाना आय और आत्मनिर्भरता
नियमित देखरेख और स्थानीय बाजार में सब्जियों की बिक्री से अंजना भगत की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनकी वार्षिक आय अब लगभग 1.50 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय स्वसहायता समूह से मिले हौसले और मुख्यमंत्री विष्णु के नेतृत्व में चल रहे प्रयासों को दिया है। अंजना भगत के अनुसार, विष्णु भैया द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में नई दिशा मिल रही है। उनकी यह उपलब्धि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।जरूरी खबरें
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