16 सितम्बर 2026 |
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23 साल बाद जग्गी हत्याकांड में बड़ा उलटफेर: पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

OM Darpan

Apr 07, 2026 04:25 am 313 views
23 साल बाद जग्गी हत्याकांड में बड़ा उलटफेर: पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

बिलासपुर (ओमदर्पण न्यूज़)।

साल 2003 के बेहद चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई (CBI) की अपील (ACQA No. 66/2026) को स्वीकार करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया है।

इसके साथ ही अमित जोगी पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में उन्हें छह माह की अतिरिक्त सश्रम कैद भुगतनी होगी। इस फैसले ने 31 मई 2007 के ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह से पलट दिया है, जिसमें अमित जोगी को बरी कर दिया गया था।

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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी- 'मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना गलत'

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि “एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराया जाना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर दिया जाना कानूनी रूप से असंगत और गलत है।”

2007 में ट्रायल कोर्ट से मिल गई थी राहत

गौरतलब है कि 31 मई 2007 को रायपुर के स्पेशल जज (एट्रोसिटी) ने इस मामले में चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी सहित 28 आरोपियों को सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस हत्याकांड में कुल 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी के बरी होने के खिलाफ मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही यह मामला दोबारा खुला और हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई हुई।

क्या था पूरा मामला?

4 जून 2003 को एनसीपी (NCP) नेता रामावतार जग्गी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कारोबारी पृष्ठभूमि वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे। जब विद्याचरण शुक्ल ने कांग्रेस छोड़कर एनसीपी का दामन थामा, तो जग्गी भी उनके साथ चले गए थे। इसके बाद विद्याचरण शुक्ल ने उन्हें छत्तीसगढ़ में एनसीपी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था। इसी दौरान इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड को अंजाम दिया गया।

ये 28 आरोपी पहले ही पाए जा चुके हैं दोषी

इस हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी पाया गया था।

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