छत्तीसगढ़ में रोजगार के नाम पर युवाओं से 'छलावा', दीपक बैज बोले- भाजपा का 'डबल इंजन' बना 'डबल शोषण का इंजन'
OM Darpan
Sep 05, 2026 02:47 am
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05 Sep 2026
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दीपक बैज का साय सरकार पर प्रहार, कहा- सरकारी भर्तियों पर लगा ताला, निजी उद्योगों से भी हो रही छंटनी
नौकरी का वादा निकला छलावा, भर्ती संस्थाओं पर लगा ताला
दीपक बैज के अनुसार, पीएससी, व्यापम और शिक्षक भर्ती जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं वर्तमान में ठप पड़ी हैं। नए पद सृजित करना तो दूर, पूर्व में स्वीकृत पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि हजारों की संख्या में विद्या मितान, अतिथि शिक्षक, संविदा कर्मचारी, रसोईया और सफाई कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। राज्य के जिला रोजगार कार्यालयों में शिक्षित युवाओं की फाइलों का अंबार लग रहा है, लेकिन रोजगार के अवसर शून्य बने हुए हैं। प्रदेश के उच्च शिक्षित इंजीनियर, ग्रेजुएट, डिप्लोमा धारक और आईटीआई प्रशिक्षित छात्र इस स्थिति के चलते हताशा और अवसाद की ओर बढ़ रहे हैं।आउटसोर्सिंग से हक पर डाका, निजी उद्योगों में स्थानीय युवाओं की छंटनी
कांग्रेस अध्यक्ष ने निजी क्षेत्रों की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जो उद्योग छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं, वे स्थानीय युवाओं की छंटनी करने में लगे हैं। आउटसोर्सिंग के नाम पर छत्तीसगढ़ी युवाओं के रोजगार के अधिकार को बाहरी लोगों को बेचा जा रहा है। बैज ने आरोप लगाया कि विष्णुदेव साय सरकार इस स्थिति को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है और सरकारी विभागों में रिक्तियों पर ताला लगा हुआ है। भाजपा की नीतियों के कारण प्रदेश में बेरोजगारी अब बेकाबू स्तर पर पहुंच गई है।कांग्रेस कार्यकाल की नीतियों से तुलना और 'डबल शोषण' का आरोप
पूर्ववर्ती सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और वन जैसे विभागों में नियमित भर्तियां की गई थीं। उन्होंने स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती, पुलिस भर्ती और राजीव युवा मितान क्लब जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। बैज ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस ने निजी उद्योगों में 80 प्रतिशत स्थानीय रोजगार के नियम को सख्ती से लागू करवाया था, जिसे भाजपा सरकार ने अब निरस्त कर दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का 'डबल इंजन' अब युवाओं के लिए 'डबल शोषण का इंजन' बन चुका है, जहां न तो सरकारी नौकरी की सुरक्षा है और न ही निजी क्षेत्र में कोई गारंटी।जरूरी खबरें
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