15 सितम्बर 2026 |
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दुर्ग मनरेगा रोजगार: 68 हजार ग्रामीणों को मिला काम, 24 करोड़ का हुआ बंपर भुगतान

OM Darpan

May 26, 2026 01:03 pm 238 views
दुर्ग मनरेगा रोजगार: 68 हजार ग्रामीणों को मिला काम, 24 करोड़ का हुआ बंपर भुगतान
 

दुर्ग, छत्तीसगढ़।

दुर्ग जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से ग्रामीण श्रमिकों को लगातार आजीविका का सहारा दिया जा रहा है। जिले की ग्राम पंचायतों में संचालित विभिन्न निर्माण कार्यों से जहां हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिल रहा है, वहीं जल संरक्षण एवं ग्रामीण अधोसंरचना विकास को भी एक नई मजबूती मिल रही है।

दुर्ग मनरेगा रोजगार की वर्तमान स्थिति

वर्तमान में जिले में प्रतिदिन 68 हजार 641 श्रमिक मनरेगा कार्यों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। जिले की ग्राम पंचायतों में कुल 3923 निर्माण कार्य संचालित हैं तथा मांग के आधार पर प्रतिदिन नए श्रमिकों को कार्य उपलब्ध कराया जा रहा है। दुर्ग मनरेगा रोजगार अभियान के तहत प्रशासन का लक्ष्य हर हाथ को काम देना है।

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जनपद पंचायतवार श्रमिकों एवं कार्यों के आंकड़े

यदि जनपद पंचायतवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले के तीनों ब्लॉकों में बड़े पैमाने पर मानव दिवस सृजित किए जा रहे हैं:

  • जनपद पंचायत दुर्ग: इसके अंतर्गत वर्तमान में 1048 कार्यों में 15 हजार 227 श्रमिक कार्यरत हैं।

  • जनपद पंचायत धमधा: यहाँ सबसे अधिक 1687 कार्यों में 29 हजार 695 श्रमिक रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

  • जनपद पंचायत पाटन: इस ब्लॉक के अंतर्गत 1188 कार्यों में 23 हजार 719 श्रमिक काम पर आ रहे हैं।

24 करोड़ से अधिक की मजदूरी राशि का हुआ भुगतान

जिले में कुल 24 करोड़ 12 लाख 53 हजार रुपये की मजदूरी राशि जनपद पंचायतों एवं क्रियान्वयन एजेंसियों के माध्यम से भुगतान की जा चुकी है। इसके अंतर्गत:

  • जनपद पंचायत दुर्ग में 8 करोड़ 99 लाख 78 हजार रुपये का भुगतान किया गया है।

  • जनपद पंचायत धमधा में 6 करोड़ 69 लाख 48 हजार रुपये श्रमिकों के खातों में भेजे गए हैं।

  • जनपद पंचायत पाटन में 6 करोड़ 28 लाख 98 हजार रुपये की राशि संबंधित श्रमिकों के बैंक खातों में जमा की गई है।

  • इसके अतिरिक्त अन्य क्रियान्वयन एजेंसियों के माध्यम से भी 2 करोड़ 14 लाख 29 हजार रुपये की मजदूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है।

प्रशासन द्वारा श्रमिकों को समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने हेतु बैंक खाते एवं आधार सत्यापन कार्य को भी प्राथमिकता से पूर्ण किया गया है। इससे मजदूरी राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही है तथा भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनी है।

ग्रामीण विकास और जल संरक्षण को प्राथमिकता

ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में अमृत सरोवर निर्माण, नवीन तालाब निर्माण, तालाब गहरीकरण, डबरी निर्माण, वाटर हार्वेस्टिंग टैंक (डब्ल्यूएचटी), कच्ची सिंचाई नाली निर्माण एवं अन्य मजदूरी मूलक कार्य प्राथमिकता से संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यों से एक ओर ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन एवं कृषि कार्यों के लिए स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी हो रहा है।

प्रशासनिक निर्देश और वित्तीय वर्ष 2026-27 की नई स्वीकृतियां

कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे के निर्देशन में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में जॉब कार्डधारियों को लगातार रोजगार उपलब्ध कराने विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, कार्यक्रम अधिकारियों एवं मैदानी अमले को श्रमिकों की मांग के अनुसार तत्काल कार्य उपलब्ध कराने तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही श्रमिकों को अधिकतम 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सभी तकनीकी सहायकों को कार्यस्थलों पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सुनिश्चित करने, सूचना बोर्ड लगाने एवं समय-समय पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि वर्ष 2026-27 में जिले में बड़े पैमाने पर मजदूरी मूलक निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसके तहत कुल 288 निर्माण कार्यों के लिए 2418.86 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसका विभाजन इस प्रकार है:

  1. जनपद पंचायत दुर्ग: 73 निर्माण कार्यों हेतु 587.41 लाख रुपये की स्वीकृति।

  2. जनपद पंचायत धमधा: 61 निर्माण कार्यों हेतु 475.17 लाख रुपये की स्वीकृति।

  3. जनपद पंचायत पाटन: 154 निर्माण कार्यों हेतु 1356.28 लाख रुपये की स्वीकृति।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने यह भी बताया कि आगामी दिनों में मांग के आधार पर मजदूरों की संख्या में और वृद्धि होगी। मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में कृषि, जल संरक्षण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

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