रायपुर के औद्योगिक मेले में जशपुर के महुआ उत्पादों की धूम
OM Darpan
महुआ नेक्टर, कुकीज और चाय के रूप में बदली वन उपज की पहचान; जनजातीय आजीविका को मिल रहा नया बाजार
रायपुर। रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशपुर के ब्रांड 'JASHPURE' और 'Jai Jungle' के स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मेले के दूसरे दिन बड़ी संख्या में पहुंचे आगंतुकों ने महुआ से तैयार आधुनिक खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग की सराहना की। कभी केवल पारंपरिक उपयोग तक सीमित रहने वाला महुआ अब जशपुर में खाद्य नवाचार, प्रसंस्करण और जनजातीय आजीविका का नया आधार बन रहा है।
महुआ नेक्टर और कुकीज ने खींचा ध्यान
मेले के हॉल नंबर-3 के स्टॉल नंबर 4 एवं 5 पर महुआ नेक्टर, महुआ नेक्टर गोल्ड, वन्यप्राश, महुआ एनर्जी पाचक, महुआ टी और महुआ आधारित कुकीज प्रदर्शित की गई हैं। इसके साथ ही रागी-महुआ उत्पाद, महुआ लड्डू और फूड-ग्रेड महुआ फूल जैसे नवाचारों को भी प्रदर्शित किया गया है। जशपुर जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 'महुआ कोश' के माध्यम से पेड़ से लेकर बाजार तक पूरी वैल्यू चेन विकसित की जा रही है।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम
स्टॉल पर जशपुर की अनेश्वरी भगत और गणपति बाई आगंतुकों को महुआ संग्रहण और इसे फूड-ग्रेड बनाने की प्रक्रिया की जानकारी दे रही हैं। जय जंगल के निदेशक समर्थ जैन ने बताया कि ग्राहकों से महुआ सेवन के बाद आयरन और हीमोग्लोबिन में सुधार के सकारात्मक फीडबैक मिल रहे हैं। अब महुआ में मौजूद आयरन की उपलब्धता और उपयोगिता पर व्यवस्थित वैज्ञानिक अध्ययन की तैयारी की जा रही है, जिससे इस वन उपज को वैश्विक बाजार में और मजबूती मिल सके।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में स्थानीय और जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और ब्रांडिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जशपुर में महुआ के संग्रहण, डिहाइड्रेशन, प्रसंस्करण और मार्केटिंग की पूरी प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है ताकि जनजातीय परिवारों और महिला समूहों की आय बढ़ सके। तीन दिवसीय इस मेले का समापन रविवार, 20 सितंबर को होगा, जहां लोग महुआ से जुड़े इन नवाचारों को देख सकेंगे।
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