मसीरा की लक्ष्मनिया ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल
OM Darpan
Aug 31, 2026 02:48 am
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31 Aug 2026
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बिहान और सरकारी योजनाओं से बदली किस्मत, अब खुद का सीएससी सेंटर चलाकर ग्रामीणों को दे रहीं डिजिटल सेवाएं
बैंक मित्र से बीसी सखी तक का आर्थिक सफर
लक्ष्मनिया के आर्थिक उत्थान की शुरुआत वर्ष 2021 में बैंक मित्र के रूप में हुई थी। दो वर्षों तक इस पद पर सेवाएं देने के बाद, वर्ष 2023 में उन्होंने बीसी सखी की जिम्मेदारी संभाली। इसके साथ ही उन्होंने क्लस्टर के माध्यम से वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। शासन की ओर से बीसी सखी बनने के लिए उन्हें 60,000 रुपये की ब्याज मुक्त सहायता मिली, जिसने उनके सफर को मजबूती दी।गांव में ही डिजिटल सेवाओं की सौगात
लक्ष्मनिया अब गांव में ही अपना सीएससी (CSC) सेंटर संचालित कर रही हैं। इस सेंटर के माध्यम से ग्रामीणों को नगद निकासी, जमा, खाता खोलने, एग्रीस्टैक, पीएम किसान, बिजली बिल भुगतान और मोबाइल रिचार्ज जैसी डिजिटल सेवाएं मिल रही हैं। इससे पहले मसीरा के ग्रामीणों को इन छोटे-छोटे कार्यों के लिए भैयाथान या बसदेई तक की दौड़ लगानी पड़ती थी, लेकिन अब गांव में ही ये सुविधाएं सुलभ हो गई हैं।पक्का मकान और स्कूटी से उड़ान
इस आत्मनिर्भरता की यात्रा ने लक्ष्मनिया के व्यक्तिगत जीवन को भी समृद्ध बनाया है। बैंक लिंकेज और क्लस्टर से कम ब्याज दर पर मिले ऋण की मदद से उन्होंने अपनी कमाई से एक इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी खरीदी और अपना पक्का मकान भी बनवाया है। कभी घर के फैसले लेने में संकोच करने वाली लक्ष्मनिया आज आर्थिक रूप से सशक्त होकर अपने फैसले खुद ले रही हैं और अपनी सफलता का श्रेय शासन के सहयोग को देती हैं।जरूरी खबरें
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