23 सितम्बर 2026 |
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

अशवंत तुषार साहू ने चारागाह और श्मशान की जमीन उद्योग को देने का किया कड़ा विरोध, कलेक्टर को सौंपा आपत्ति पत्र

शेयर करें

OM Darpan

Aug 08, 2025 11:07 am 732 views
अशवंत तुषार साहू ने चारागाह और श्मशान की जमीन उद्योग को देने का किया कड़ा विरोध, कलेक्टर को सौंपा आपत्ति पत्र
  महासमुंद। भाजपा किसान नेता अशवंत तुषार साहू ने महासमुंद जिले में चारागाह और श्मशान घाट की भूमि को एक उद्योग को दिए जाने के प्रस्तावित कदम का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर को एक शिकायत पत्र सौंपा है और ग्रामीणों के आक्रोश को सामने रखा है। यह विरोध ग्राम पंचायत बिरकोनी की शासकीय भूमि मनोरमा इंडस्ट्री को बिना पंचायत के प्रस्ताव के दिए जाने को लेकर है।

मनोरमा इंडस्ट्री पर पुराने आरोप

ग्रामीणों और अशवंत तुषार साहू के अनुसार, मनोरमा इंडस्ट्री पहले भी विवादों में रही है। कंपनी ने लगभग 100 साल पुराने चुहरी तालाब को कृषि भूमि बताकर खरीद लिया था। इस खरीद के लिए कंपनी ने शासन से स्टांप ड्यूटी में 58 लाख रुपये से अधिक की छूट भी प्राप्त की थी। यह तथ्य ग्रामीणों के मौजूदा विरोध को और बल देता है, क्योंकि वे कंपनी की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।

भूमि हस्तांतरण का विरोध

यह मामला तब सामने आया जब तहसीलदार न्यायालय द्वारा 23 जुलाई को ग्राम पंचायत बिरकोनी के औद्योगिक क्षेत्र से दूर स्थित खसरा नंबर 2435, 2436, 2619, 2620, 2616, 2614, रकबा  1.72, 0.45, 0.22, 10.95, 0.12 (कुल रकबा 3.48 हेक्टेयर) भूमि को जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग महासमुंद को हस्तांतरण किए जाने के लिए दावा आपत्ति हेतु ईश्तहार जारी किया गया। इस सूचना की भनक लगते ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कलेक्टोरेट पहुंचे और मनोरमा इंडस्ट्री को भूमि दिए जाने पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

ग्रामीणों के लिए भूमि का महत्व

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि विवादित भूमि में खसरा नंबर 2485 चारागाह भूमि है और खसरा नंबर 2620 श्मशान भूमि है। इसके अतिरिक्त, इसी भूमि पर जिला मॉडल गौठान के तहत रीपा प्रोजेक्ट का कार्य भी किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, खसरा नंबर 2435 को ग्राम पंचायत द्वारा उनके विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रस्तावित किया गया है। इस भूमि के कुछ भाग पर मनरेगा के तहत चारागाह का निर्माण भी किया गया है, जो ग्रामवासियों के निस्तारी का एकमात्र साधन है। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन उनके दैनिक उपयोग और मुक्तिधाम के लिए अत्यंत आवश्यक है और वे इसे किसी भी हाल में मनोरमा इंडस्ट्री को नहीं देना चाहते।

कलेक्टर से तत्काल रोक की मांग

अशवंत तुषार साहू और ग्रामीणों ने कलेक्टर से जनहित को देखते हुए इस मामले में तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में अनुरोध किया है कि सरकारी भूमि का उपयोग जनहित के कार्यों और ग्रामीणों की आवश्यकताओं के लिए ही किया जाना चाहिए, न कि किसी उद्योग के विस्तार के लिए, खासकर जब यह ग्रामीणों के बुनियादी अधिकारों और पर्यावरण को प्रभावित करता हो।
Tags

शेयर करें

विज्ञापन / Advertisement

Government Advertisement
260923112211581

विज्ञापन

Advertisement