किसानों के लिए एग्री वेलफेयर पोर्टल लॉन्च अब मोबाइल पर मिलेगी हर जानकारी
OM Darpan

नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया और किसान कल्याण के विजन के तहत नवरात्रि की नवमी पर संशोधित 'एग्री वेलफेयर पोर्टल' की शुरुआत की गई है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर सरकारी योजनाओं, आर्थिक सहायता और खेती की सटीक जानकारी सीधे उनके मोबाइल फोन तक पहुंचाना है।
दफ्तरों के चक्कर से मिलेगी मुक्ति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तकनीक की असली सार्थकता तभी है जब वह सीधे खेत-खलिहान तक पहुंचे। अब किसानों को किसी भी योजना के आवेदन या जानकारी के लिए अलग-अलग वेबसाइटों और दफ्तरों में नहीं भटकना पड़ेगा। यह मंच केवल किसानों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), शोधकर्ताओं, कृषि वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स को भी एक साथ जोड़ेगा।
सरल भाषा और ट्रेनिंग पर जोर
अधिकारियों को निर्देश देते हुए कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि पोर्टल की सफलता सटीक और समयबद्ध सूचनाओं पर निर्भर है, इसलिए जानकारी को लगातार अपडेट रखा जाए। पोर्टल की भाषा और प्रक्रिया को इतना आसान रखा गया है कि कम पढ़े-लिखे छोटे और सीमांत किसान भी इसे आसानी से उपयोग कर सकें। किसानों को इस तकनीक में माहिर बनाने के लिए देश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के जरिए विशेष प्रशिक्षण अभियान भी चलाया जाएगा।
पीएम-किसान और फसल बीमा का सिंगल विंडो
यह नया पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित और मोबाइल-फ्रेंडली है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह पीएम-किसान, एग्रीस्टैक और पीएम फसल बीमा जैसी बड़ी योजनाओं के लिए एक साझा प्रवेश-द्वार (सिंगल विंडो) का काम करेगा। कृषि मंत्री ने इस पोर्टल को समय पर तैयार करने के लिए तकनीकी टीम की सराहना की। शुभारंभ के मौके पर कृषि सचिव अतीश चंद्रा, अतिरिक्त सचिव प्रमोद मेहरदा सहित डिजिटल कृषि प्रभाग और एनआईसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
धीमे इंटरनेट में भी तेजी से करेगा काम
ग्रामीण क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए इस पोर्टल को बेहद हल्का बनाया गया है, जिससे यह धीमे नेटवर्क और साधारण स्मार्टफोन पर भी आसानी से काम करता है। इसमें ऑनलाइन पात्रता जांच और सीधे बैंक खाते में सहायता राशि (डीबीटी) पहुंचने की सुविधा है, जिससे पारदर्शिता आएगी। किसानों को समय पर मंडी भाव, मौसम का हाल, बीज-खाद की उपलब्धता और वैज्ञानिक खेती के तरीकों की प्रामाणिक जानकारी मिलेगी। सरकारी मानकों पर बने इस पोर्टल को दृष्टिबाधित और दिव्यांग जन भी स्क्रीन-रीडर की मदद से आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे।
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