पराली पर केंद्र सख्त, फाइलों से बाहर निकल मैदान में काम करें अधिकारी
OM Darpan
नई दिल्ली।
धान कटाई के बीच पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सख्ती दिखाई है। नई दिल्ली के कृषि भवन में आयोजित अंतर-मंत्रालयी उच्चस्तरीय बैठक में राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रशासनिक अमला फाइलों से निकलकर जमीनी स्तर पर काम करे। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि फसल कटाई और रबी की बुवाई के बीच समय बेहद कम है, इसलिए जिलाधिकारी स्तर पर त्वरित कार्ययोजना लागू कर सख्त निगरानी की जाए।
मध्य प्रदेश और राजस्थान की स्थिति पर चिंता
बैठक में पराली जलाने के ताजा आंकड़ों की समीक्षा की गई। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 53.3 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में लगभग 32 प्रतिशत की कमी आई है। पंजाब में भी मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मामले बढ़ने पर उन्होंने गहरी चिंता जताई। केंद्र ने इन दोनों राज्यों को प्रभावित जिलों की पहचान कर तत्काल विशेष कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं।
किसानों को मिले सस्ता और सुलभ विकल्प
केवल पाबंदी लगाने को नाकाफी बताते हुए कृषि मंत्री ने किसानों को आसान और सस्ता विकल्प देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पराली समस्या नहीं, बल्कि किसानों की अतिरिक्त आय का जरिया है। इसका उपयोग बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल और जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है। केंद्र सरकार अब तक राज्यों को 3.54 लाख से ज्यादा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें दे चुकी है। चौहान ने पुरानी बंद पड़ी मशीनों की मरम्मत कर उन्हें तुरंत चालू करने और छोटे किसानों को सस्ती दर पर किराये पर मशीनें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा, पंजाब सरकार से लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जल्द भेजने को कहा गया है ताकि फंड की अगली किस्त जारी की जा सके।
तीन बजे के बाद सैटेलाइट गैप पर रहे नजर
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने केवल सैटेलाइट के भरोसे रहने के बजाय जमीनी निगरानी बढ़ाने की बात कही। उन्होंने बताया कि उपग्रह निगरानी में दोपहर तीन बजे के बाद सैटेलाइट पास न होने के कारण एक गैप आता है। इस अंतराल में फ्लाइंग स्क्वॉड और ग्राउंड पेट्रोलिंग के जरिए खेतों पर सख्त नजर रखी जानी चाहिए। यादव ने पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर और हरियाणा के कैथल, करनाल व कुरुक्षेत्र जैसे संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। प्रदूषण नियंत्रण को प्रभावी बनाने के लिए पराली के आंकड़ों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से जोड़ने को कहा गया है।
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