पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और एसीएसआईआर में ऐतिहासिक करार अब दस संस्थानों में मिलेगी पीएचडी की सुविधा
OM Darpan
नई दिल्ली। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) और वैज्ञानिक एवं नवोन्मेष अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) के बीच पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के क्षेत्र में उन्नत शोध और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक अहम रणनीतिक समझौता हुआ है। इसके तहत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले 10 प्रमुख अनुसंधान संस्थानों को एसीएसआईआर से संबद्ध अनुसंधान संस्थान (एआरआई) के रूप में मान्यता मिल गई है। इस ऐतिहासिक समझौते की औपचारिक घोषणा 13 अक्टूबर को पृथ्वी भवन मुख्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में की गई।
मूल रूप से 21 अगस्त को हुए इस करार पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से मिशन मौसम के निदेशक व वैज्ञानिक-जी डॉ. प्रवीण कुमार डी. और एसीएसआईआर के निदेशक प्रो. मनोज कुमार धर ने हस्ताक्षर किए थे। मंगलवार को आयोजित समारोह में मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में दस्तावेजों का औपचारिक आदान-प्रदान संपन्न हुआ।
छात्रों और वैज्ञानिकों दोनों को होगा लाभ
इस अवसर पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने सहयोगात्मक अनुसंधान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास जताया कि इस एकीकरण से संस्थान, वैज्ञानिक और पृथ्वी विज्ञान के शोधार्थी व्यापक रूप से लाभान्वित होंगे। यह संयुक्त ढांचा राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के बीच संसाधनों के सुव्यवस्थित बंटवारे और शुरुआती करियर वाले वैज्ञानिकों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
संस्थानों में वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में होगा शोध
नई व्यवस्था के तहत अब चयनित छात्र पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में शोध कार्य पूरा करेंगे। इन वैज्ञानिकों को एसीएसआईआर संकाय के रूप में मान्यता दी गई है। छात्रों को डॉक्टरेट की डिग्री एसीएसआईआर द्वारा ही प्रदान की जाएगी, जिसके प्रमाणपत्र पर शोध कराने वाले मेजबान संस्थान का स्पष्ट उल्लेख होगा। मंत्रालय के सभी दस संस्थान नवीनतम पीएचडी नामांकन प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं।
इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खुलेंगे डॉक्टरेट के अवसर
इस अहम साझेदारी से वायुमंडलीय और महासागरीय विज्ञान के साथ-साथ कई विशिष्ट क्षेत्रों में शोध के दरवाजे खुल गए हैं। छात्र अब मौसम पूर्वानुमान, जलवायु सेवाएं, ध्रुवीय अनुसंधान, समुद्री रोबोटिक्स, गहरे समुद्र में खनन, भूकंप विज्ञान, तटीय प्रक्रियाओं और पृथ्वी विज्ञान में एआई/एमएल (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग) के उपयोग जैसे उन्नत विषयों पर डॉक्टरेट कर सकेंगे। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि शोध से उत्पन्न होने वाले बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) में छात्र को आविष्कारक का श्रेय मिले और संयुक्त संपदा को आपसी सहमति से साझा किया जाए।
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