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आपराधिक मामलों में अब नहीं होगी देरी, सुप्रीम कोर्ट ने तय की 60 दिन की सीमा

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OM Darpan

Oct 31, 2025 12:23 am 341 views
आपराधिक मामलों में अब नहीं होगी देरी, सुप्रीम कोर्ट ने तय की 60 दिन की सीमा
  नई दिल्ली। आपराधिक मुकदमों में सालों तक आरोप तय न होने के कारण न्याय में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गंभीर चिंता जाहिर की। अदालत ने संकेत दिया है कि वह पूरे देश की सभी अदालतों के लिए सख्त निर्देश जारी करेगी ताकि आरोप तय करने की समयसीमा का पालन सुनिश्चित हो सके। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि आरोप तय करने में हो रही यह देरी आपराधिक मामलों की कार्यवाही (प्रोसिडिंग्स) में ठहराव के प्रमुख कारणों में से एक है। अदालत ने कहा कि उसका “यह विचार है कि पूरे देश में कुछ निर्देश जारी किए जाने चाहिए ताकि इस वैधानिक आदेश का पालन सुनिश्चित हो सके।"

BNSS में है 60 दिन की समयसीमा

कोर्ट ने इस दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 251(बी) का उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिन मामलों की सुनवाई विशेष रूप से सेशन कोर्ट की ओर से की जानी है, उनमें पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाने चाहिए। एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा सामने आया कि एक अभियुक्त को दो वर्ष से हिरासत में रखा गया है, फिर भी अब तक आरोप तय नहीं किए गए हैं। इस पर कोर्ट ने सवाल किया, “आरोप तय करने में वर्षों क्यों लगते हैं? दीवानी मामलों में मुद्दे तय नहीं होते, और आपराधिक मामलों में आरोप तय नहीं होते।”

पूरे देश के लिए निर्देश जारी होंगे

न्यायालय ने इस समस्या से निपटने के लिए देशव्यापी निर्देश जारी करने का इरादा जताया। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा से अनुरोध किया कि वे इस मामले में अमाइकस क्यूरी (कोर्ट सलाहकार) के रूप में सहायता करें। साथ ही, अदालत ने भारत के अटॉर्नी जनरल से भी सहायता मांगी, क्योंकि वह इस तरह की देरी से निपटने के लिए देशव्यापी निर्देश जारी करने पर विचार कर रही है। बिहार राज्य के वकील ने कुछ दिशा-निर्देश जारी करने की वकालत की, वहीं महाराष्ट्र राज्य के वकील ने न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ की ओर से पारित एक आदेश का उल्लेख किया, जिसमें महाराष्ट्र में 649 मामलों में आरोप तय न होने की “चौंकाने वाली स्थिति” पर चिंता व्यक्त की गई थी। इस पर न्यायमूर्ति कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि वे जिला अदालतों से जानकारी आने की प्रतीक्षा नहीं करेंगे, बल्कि पूरे भारत में एक साथ निर्देश जारी करेंगे। याचिकाकर्ता, जो कि BNSS की धारा 309(5) और आर्म्स एक्ट की धारा 27 जैसे अपराधों के आरोप में 10 अगस्त 2024 से हिरासत में है, ने नियमित ज़मानत की मांग की है। उसके वकील ने तर्क दिया कि आरोपपत्र दाखिल होने के बावजूद कोई उचित कारण बताए बिना आरोप तय नहीं किए गए। अदालत ने मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद के लिए लिस्ट करने का आदेश दिया है।
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