17 सितम्बर 2026 |
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AI से सशक्त होंगे विधानमंडल: उपसभापति हरिवंश

OM Darpan

Jan 21, 2026 12:07 am 282 views
AI से सशक्त होंगे विधानमंडल: उपसभापति हरिवंश

लखनऊ।

संसदीय लोकतंत्र को आधुनिक तकनीक से लैस करने और विधायी कामकाज में पारदर्शिता व कुशलता लाने के लिए अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का सहारा लिया जाएगा। लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने संसद और राज्य विधानसभाओं के बीच एक मजबूत समन्वय का आह्वान किया।

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संस्थागत ज्ञान से प्रशिक्षित होगा एआई

हरिवंश ने जोर देकर कहा कि संसदीय उपयोग के लिए एआई की सार्थकता केवल उसके एल्गोरिथम तक सीमित नहीं है, बल्कि उस ज्ञान पर निर्भर है जिससे उसे प्रशिक्षित किया जाता है। उन्होंने कहा, "संसदीय ज्ञान अद्वितीय है, जो दशकों की बहसों, परंपराओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं से उपजा है। इसलिए, संसदीय एआई को संसद के भीतर के आंकड़ों से ही पोषित किया जाना चाहिए।"

बिखरी सूचनाएं होंगी एक जगह

उपसभापति ने एक 'डेटा लेक' की अवधारणा पेश की, जिसमें देश भर के विधायी दस्तावेजों, बजटीय बहसों और शब्दावलियों को समाहित किया जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नीतिगत सूचनाएं विभिन्न मंत्रालयों में बिखरी हुई हैं। एआई के माध्यम से एक ऐसा मंच तैयार किया जा सकता है जहां ये सभी दस्तावेज आसानी से सुलभ हों, जिससे संवैधानिक संस्थाएं ज्ञान के वास्तविक केंद्र के रूप में उभर सकें।

मानवीय निगरानी और हाइब्रिड तंत्र पर जोर

तकनीक के साथ सावधानी बरतने की सलाह देते हुए उन्होंने एक 'हाइब्रिड तंत्र' बनाने का सुझाव दिया। इसके तहत एआई के परिणामों पर हमेशा मानवीय निगरानी बनी रहनी चाहिए। उन्होंने बताया कि संसद में वर्तमान में विभिन्न भाषाओं में ट्रांसक्रिप्शन और रीयल-टाइम अनुवाद का परीक्षण चल रहा है, जिससे सांसद अपनी पसंद की भाषा में कार्यवाही देख सकेंगे।

प्रशासनिक कार्यों में भी मिलेगी मदद

एआई के व्यावहारिक लाभ गिनाते हुए हरिवंश ने कहा कि प्रश्नकाल के दौरान सवालों की स्वीकार्यता की जांच और पुराने उदाहरणों को खोजने जैसे नियमित कार्य अब तकनीक की मदद से तेजी से किए जा सकेंगे। उन्होंने विधायकों और कर्मचारियों के लिए विशेष जागरूकता और प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की भी वकालत की।

बता दें कि यह दो दिवसीय सम्मेलन 19 जनवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति में शुरू हुआ था, जिसमें विधायकों की जवाबदेही और क्षमता निर्माण जैसे गंभीर विषयों पर मंथन किया जा रहा है।

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