मुंबई (ओमदर्पण न्यूज़)।
भारत में तेजी से बढ़ रहे हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के मामलों के बीच इलाज को आसान और अधिक असरदार बनाने की दिशा में एक बड़ी मेडिकल पहल सामने आई है। प्रमुख दवा कंपनी कैडिला फार्मास्युटिकल्स ने ‘सिलेज ट्रायो’ (Cilage Trio) नाम की नई ट्रिपल कॉम्बिनेशन थेरेपी लॉन्च की है। यह एक ही गोली में तीन शक्तिशाली दवाओं का संतुलित मेल प्रस्तुत करती है। कंपनी का दावा है कि यह न सिर्फ ब्लड प्रेशर को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करती है, बल्कि मरीजों के लिए बार-बार अलग-अलग दवा लेने के झंझट को भी खत्म करती है। यह नई थेरेपी विशेष रूप से उन लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है, जो लंबे समय से हाइपरटेंशन और दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं।
22 करोड़ भारतीय हैं हाई बीपी से पीड़ित
आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 22 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से प्रभावित हैं। समय पर उचित जांच और नियमित इलाज के अभाव में यह स्थिति अक्सर जानलेवा हो जाती है। ऐसे गंभीर हालातों में ‘सिलेज ट्रायो’ एक एडवांस फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन के रूप में बाजार में उतारी गई है। इस एक टैबलेट में सिलनिडिपिन (Cilnidipine), टेल्मिसार्टन (Telmisartan) और मेटोप्रोलोल (Metoprolol) जैसी तीन अत्यंत प्रभावी दवाओं को जोड़ा गया है।
तीन तरीकों से काम करेगी दवा, साइड इफेक्ट्स भी कम
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह संयोजन शरीर पर तीन अलग-अलग तरीकों से काम करता है:
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ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) को रिलैक्स करना।
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हार्मोनल प्रभाव को नियंत्रित करना।
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दिल की धड़कन को संतुलित बनाए रखना।
इस थेरेपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पारंपरिक दवाओं की तुलना में इसमें बेहतर सहनशीलता है और साइड इफेक्ट्स बेहद कम हैं। उदाहरण के लिए, बीपी की दवाओं से अक्सर मरीजों के पैरों में सूजन आ जाती है, लेकिन इस नई दवा में इसकी संभावना काफी कम बताई जा रही है।
‘ट्राय-टैब टेक्नोलॉजी’ से बनी है गोली
कंपनी के अनुसार, यह दवा आधुनिक ‘ट्राय-टैब टेक्नोलॉजी’ (Tri-tab Technology) पर आधारित है। अपनी तीन परतों वाली विशेष संरचना के कारण यह शरीर में दवा के अवशोषण को बेहतर बनाती है और इसका असर लंबे समय तक बना रहता है। इससे ब्लड प्रेशर तो नियंत्रण में रहता ही है, साथ ही हृदय (हार्ट) को भी अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कॉम्बिनेशन थेरेपी भविष्य में हाइपरटेंशन मैनेजमेंट को कहीं अधिक सुरक्षित, प्रभावी और आसान बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।






