क्या खुश रहने के लिए समृद्धि ही काफी है? मनीषा की कहानी देती है जवाब
शाम का समय, घर का बरामदा और मन में उठते असंख्य सवाल… मनीषा अकेली बैठी थी, जब उसकी नजर सामने से गुजर रही खेत में काम कर लौटी मजदूर महिलाओं पर पड़ी। वे थकान के बावजूद हंसी-खुशी से गीत गाते हुए जा रही थीं। उनके सिर पर खाने के खाली डब्बे, टोकनियाँ और फावड़ा थे, … Read more