सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को लगाई फटकार, महिला सरपंच को हटाने पर लगाया 1 लाख रुपये का जुर्माना
OM Darpan
Nov 15, 2024 10:59 pm
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15 Nov 2024
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रायपुर।
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जशपुर जिले के एक सुदूरवर्ती गांव की निर्वाचित महिला सरपंच सोनम लकड़ा को ‘अनुचित कारणों’ से हटाने पर नाराजगी व्यक्त की है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि सरपंच ‘‘बाबू (नौकरशाह) के सामने भीख का कटोरा लेकर जाए।’’
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने सरपंच सोनम लकड़ा के साथ हुए मानसिक उत्पीड़न को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने इसे अधिकारियों की ओर से की गई मनमानी और निर्वाचित प्रतिनिधि के साथ किए गए अनुचित व्यवहार का मामला करार दिया।
खंडपीठ ने कहा कि एक युवा महिला, जिसने अपने सुदूर गांव के विकास के लिए कदम उठाए, उसके साथ सहयोग करने के बजाय उसे परेशान किया गया। बेंच ने निर्माण सामग्री की आपूर्ति और निर्माण कार्यों में देरी को आधार बनाकर सरपंच को पद से हटाने की प्रक्रिया को ‘‘बेकार का बहाना’’ बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्माण कार्यों में मौसम, सामग्री की आपूर्ति और अन्य तकनीकी कारण शामिल होते हैं, जिन पर सरपंच का सीधा नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में निर्माण कार्यों में देरी के लिए सरपंच को दोषी ठहराना अनुचित है।
खंडपीठ ने उप-संभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा पारित निष्कासन आदेश को रद्द कर दिया और सोनम लकड़ा को उनके कार्यकाल तक सरपंच के पद पर बहाल कर दिया। साथ ही निर्देश दिया कि राज्य सरकार महिला को परेशान करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से 1 लाख रुपये की राशि वसूलने के लिए स्वतंत्र है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला एक निर्वाचित प्रतिनिधि को झूठे बहाने से पद से हटाने का है, जो अस्वीकार्य है। अदालत ने सोनम लकड़ा के साथ हुए उत्पीड़न के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस तरह के मामले लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं।
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