- कुर्सी संभालते ही जारी किए तीन बड़े निर्देश
- डिजिटल फास्टिंग, पॉलिथीन मुक्त जिला और पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर
जांजगीर-चांपा.
अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जिला प्रशासन और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वाधान में एक अभिनव पहल देखने को मिली। 12वीं कक्षा की छात्रा दीक्षा सारथी को 15 मिनट के लिए प्रतीकात्मक रूप से जिले का कलेक्टर बनाया गया। इस संक्षिप्त कार्यकाल में दीक्षा ने न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी का अनुभव लिया, बल्कि जनहित से जुड़े तीन महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए।
कुर्सी संभालते ही तीन अहम फैसले
सुबह 11 बजे कलेक्टोरेट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दीक्षा सारथी ने कलेक्टर की कुर्सी संभालते ही तत्परता दिखाई। उन्होंने अपने 15 मिनट के कार्यकाल में तीन प्रमुख प्रस्तावों को लागू करने के निर्देश दिए:
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डिजिटल फास्टिंग: सरकारी और निजी कार्यालयों में कागज का उपयोग कम करने और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
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पॉलिथीन मुक्त जिला: पर्यावरण संरक्षण और शहर की साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए जिले को पॉलिथीन मुक्त बनाने का निर्देश।
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एक पेड़ मां के नाम: पौधों की सुरक्षा और नए पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए इस अभियान पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।
छात्राओं ने साझा किए सुझाव
कार्यक्रम में जिले के निजी स्कूलों की छात्राओं ने कलेक्टर जन्मेजय महोबे से मुलाकात की। इस दौरान छात्राओं ने प्रशासन के समक्ष अपने सवाल रखे और सुझाव साझा किए। इसी संवाद के दौरान प्रशासन ने एक छात्रा को प्रतीकात्मक रूप से कलेक्टर का दायित्व सौंपने का निर्णय लिया, जिसका सम्मान दीक्षा को प्राप्त हुआ।
आईएएस बनने का सपना हुआ और भी दृढ़
दीक्षा सारथी ने बताया कि यह 15 मिनट का अनुभव उनके जीवन के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनना है, ताकि वे समाज में वास्तविक बदलाव ला सकें।
नेतृत्व क्षमता का विकास जरूरी
कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि छात्रों, विशेषकर ग्रामीण अंचल की छात्राओं को नेतृत्व का अवसर देना महत्वपूर्ण है। सीधे प्रशासनिक अनुभव से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास होता है। प्रशासन ने भविष्य में अन्य स्कूलों में भी इस तरह की पहल दोहराने की योजना बनाई है।






