दुर्ग। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने ‘अगस्त क्रांति’ के तहत विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी और उप प्रांताध्यक्ष विष्णु सिंह राजपूत ने बताया कि 6 अगस्त 2024 को इंद्रावती भवन (संचालनालय) से महानदी भवन (मंत्रालय) तक मशाल रैली आयोजित की जाएगी। रैली के दौरान ‘लेकर रहिबो लेकर रहिबो, मोदी की गारंटी लेकर रहिबो’ जैसे नारे गूंजेंगे।
फेडरेशन का चार स्तरीय आंदोलन
फेडरेशन ने चार चरणों में आंदोलन की योजना बनाई है:
- पहला चरण: 6 अगस्त को इंद्रावती भवन से महानदी भवन तक मशाल रैली और प्रदर्शन।
- दूसरा चरण: 20 से 30 अगस्त तक सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपना।
- तीसरा चरण: 11 सितंबर को जिला, ब्लॉक, और तहसीलों में मशाल रैली का आयोजन।
- चौथा चरण: 27 सितंबर को सामूहिक अवकाश लेकर जिलों में धरना-प्रदर्शन।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे।
मांगों का सार
फेडरेशन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- केंद्र के समान देय तिथि से महँगाई भत्ता (डीए) एरियर्स सहित 1 जनवरी 2024 से 4% वृद्धि।
- महँगाई भत्तों के एरियर्स राशि का समायोजन जीपीएफ खाते में।
- चार स्तरीय समयमान वेतनमान, गृह भाड़ा भत्ता, और अर्जित अवकाश नगदीकरण में वृद्धि।
- कर्मचारियों को 1 जनवरी और 1 जुलाई को महँगाई भत्ता स्वीकृत नहीं करने के कारण हुए नुकसान की भरपाई।
फेडरेशन ने बताया कि राज्य कर्मचारियों को 1 जुलाई 2019 से 31 जुलाई 2024 तक जबरदस्त आर्थिक नुकसान हुआ है। इस नीति से चतुर्थ श्रेणी को ₹ 68,750, तृतीय श्रेणी को ₹ 108,980, द्वितीय श्रेणी को ₹ 193,490 और प्रथम श्रेणी को ₹ 445,880 का औसत नुकसान हुआ है।









