सरगुजा। छत्तीसगढ़ शासन की राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं जहां स्वरोजगार और आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं, वहीं समाजहित के कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम खैरबार की श्रीमती लक्ष्मी यादव इसकी प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं। उन्होंने ‘बिहान’ से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की, बल्कि पोषण सखी के रूप में महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।
परिवार की सुधरी माली हालत
लक्ष्मी यादव बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी बड़ी चुनौती थी। ‘बिहान’ योजना से जुड़ने के बाद उन्हें पोषण सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उनकी आय का नियमित स्रोत बना और परिवार की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार हुआ। लक्ष्मी यादव को पोषण सखी के रूप में प्रतिमाह लगभग 1,000 रुपये का मानदेय प्राप्त होता है। इसके साथ ही महतारी वंदन योजना के अंतर्गत मिलने वाली प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता राशि भी परिवार के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल साबित हो रही है। इस राशि का उपयोग वे बच्चों की शिक्षा और दैनिक खर्चों में कर रही हैं।
कुपोषण के खिलाफ शुरू की जंग
पोषण सखी के रूप में लक्ष्मी यादव गांव-गांव और घर-घर जाकर गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व की जानकारी दे रही हैं। वे आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करती हैं। साथ ही कुपोषित बच्चों की पहचान कर उनके परिवारों को उचित पोषण और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रेरित करती हैं। लक्ष्मी यादव ने अपनी सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज सेवा का भी मौका दिया है।









